पिंक सिटी जयपुर की पुरानी बस्तियों में आज भक्ति की मधुर लहरें गूंज रही हैं। शीतलाष्टमी के पावन अवसर पर शुरू हुआ 86वां श्री प्रेमभाया महोत्सव चार दिवसीय भक्ति संगीत समारोह के रूप में ढूंढाड़ की प्राचीन सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को नई ऊर्जा दे रहा है। युगल कुटीर, जयलाल मुंशी का रास्ता, चांदपोल बाजार (परकोटे की पुरानी बस्ती) में आयोजित यह महोत्सव 11 मार्च से 14 मार्च 2026 तक चल रहा है। यहां 70 से ज्यादा भजन गायक, कलाकार और भक्त मंडलियां लगातार 96 घंटे (4 दिन) अखंड भजन गाकर श्री प्रेमभाया सरकार (भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप) का गुणगान कर रही हैं। कुल 310 से अधिक ढूंढाड़ी भजन प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जो पं. युगल किशोर शास्त्री द्वारा रचित हैं।
महोत्सव की शुरुआत और विशेषताएं
11 मार्च को वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और पंचामृत अभिषेक से श्री प्रेमभाया सरकार को नवीन पोशाक पहनाई गई। इसके बाद रात्रि 8 बजे से संपूर्ण रात्रि भक्ति संगीत समारोह शुरू हुआ। 11, 12 और 13 मार्च को रात्रि भर भजन-कीर्तन चला, जबकि 12, 13 और 14 मार्च को दिन में महिला मंडलों द्वारा विशेष भक्ति प्रस्तुतियां दी गईं। महोत्सव का समापन 14 मार्च को सायं 7 बजे नगर संकीर्तन से होगा, जो युगल कुटीर से शुरू होकर परकोटे की गलियों से गुजरते हुए प्रातः 7 बजे वापस लौटेगा।
यह वर्ष विशेष है क्योंकि 11 साल बाद महोत्सव तीन की बजाय चार दिवसीय हो रहा है, जिससे भक्तों को ज्यादा समय मिला है भक्ति रस में डूबने का। श्री प्रेमभाया मंडल समिति के अध्यक्ष दुर्गा चौधरी ने बताया, “यह महोत्सव सिर्फ संगीत का नहीं, बल्कि ढूंढाड़ अंचल की भाषा, संस्कृति और प्रेम-भक्ति की परंपरा का जश्न है। पं. युगल किशोर जी शास्त्री (जन्म 1916) ने 1940 से युगल कुटीर में इस परंपरा की शुरुआत की थी, जो आज भी निरंतर है।”
ढूंढाड़ विरासत का जश्न
ढूंढाड़ी भाषा में रचे गए ये भजन जयपुर की अनोखी पहचान हैं। भक्त शिरोमणि युगलजी महाराज ने भगवान कृष्ण के बाल रूप को “श्री प्रेमभाया सरकार” नाम दिया और ढूंढाड़ी में पद-भजन रचे, जो प्रेम, भक्ति और सामाजिक सद्भाव का संदेश देते हैं। महोत्सव में कश्मीर से कन्याकुमारी तक के भजन गायक शामिल हो रहे हैं। परकोटे की संकरी गलियां भक्ति की धुनों से गूंज रही हैं – हर घर में रोशनी, रंगोली और भक्तों की भीड़। पूरा वातावरण भक्ति रस से सराबोर है, जहां साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल देखने को मिल रही है।
समिति के संरक्षक विजय किशोर शर्मा ने कहा, “यह महोत्सव जयपुर की हेरिटेज सिटी वाली पहचान को मजबूत करता है। भक्ति संगीत से न सिर्फ आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि हमारी प्राचीन परंपराएं भी जीवित रहती हैं।”
भक्तों का उत्साह चरम पर
भक्तों का कहना है कि साल भर इस महोत्सव की प्रतीक्षा रहती है। एक भक्त ने बताया, “प्रेमभाया सरकार की जय! यहां आने से मन को सुकून मिलता है, ढूंढाड़ी भजन सुनकर लगता है जैसे पुरानी यादें जीवित हो गईं।” महोत्सव में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है – सभी भक्त सादर आमंत्रित हैं।
यह महोत्सव जयपुर की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है। भक्ति की मधुर धुनों ने न सिर्फ परकोटे को महका दिया है, बल्कि पूरे शहर में भक्ति की लहर फैला दी है। श्री प्रेमभाया सरकार की जय!






