दोहा/तेहरान, 20 मार्च 2026 — मध्य पूर्व में युद्ध की आग और भड़क गई है। इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर किए गए हमले के कुछ घंटों बाद ही ईरान ने जबरदस्त जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल हमला कर दिया। यह दुनिया का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यात केंद्र है, जो वैश्विक गैस आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा संभालता है।
कतर एनर्जी और कतर सरकार ने आधिकारिक बयान में कहा कि ईरानी मिसाइलों ने रास लफान पर “व्यापक क्षति” पहुंचाई है। हमले से कई LNG ट्रेनों और गैस-टू-लिक्विड्स प्लांट में भीषण आग लग गई। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, कतर की LNG निर्यात क्षमता में 17% की कमी आ सकती है, जिसकी मरम्मत में 3 से 5 साल लग सकते हैं। कतर के विदेश मंत्रालय ने ईरान के सैन्य और सुरक्षा अटैची को “पर्सोना नॉन ग्राटा” घोषित कर 24 घंटे के अंदर देश छोड़ने का आदेश दिया है।
ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने इसे “साउथ पार्स पर इजरायली हमले का सीधा और मजबूत जवाब” बताया। ईरान के तेल मंत्रालय ने कहा कि इजरायली हमले से साउथ पार्स के असलूयह प्रोसेसिंग हब और कई अन्य सुविधाओं को नुकसान पहुंचा, जहां से रोजाना लाखों क्यूबिक मीटर गैस उत्पादन होता है। ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ तो पूरे खाड़ी क्षेत्र में तेल-गैस सुविधाओं को निशाना बनाया जाएगा।
इस घटनाक्रम से वैश्विक ऊर्जा बाजार हिल गया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें अस्थायी रूप से 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जबकि LNG की कीमतें यूरोप, अमेरिका और एशिया में तेजी से बढ़ी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कतर पर फिर हमला हुआ तो अमेरिका “साउथ पार्स गैस फील्ड को पूरी ताकत से तबाह” कर देगा, जिसका ईरान ने पहले कभी सामना नहीं किया होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऊर्जा युद्ध की नई और खतरनाक कड़ी है। साउथ पार्स/नॉर्थ डोम फील्ड दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार है, जो ईरान और कतर के बीच साझा है। अब तक की यह सबसे बड़ी ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों की घटना है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
कतर ने हमले की निंदा करते हुए इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा” करार दिया है। क्षेत्रीय देशों में हाई अलर्ट जारी है, और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है।






