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March 21, 2026 2:17 pm

ईरान ने कतर के रास लफ्फान LNG प्लांट पर मिसाइल हमला किया, व्यापक क्षति और आग लगी

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दोहा/तेहरान, 19 मार्च 2026 – मध्य पूर्व में चल रहे ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध ने नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। इजरायल द्वारा ईरान के दुनिया के सबसे बड़े साउथ पार्स गैस फील्ड

पर हमले के जवाब में ईरान ने कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल हमला कर दिया, जहां दुनिया का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) प्लांट स्थित है।

कतर एनर्जी (QatarEnergy) ने आधिकारिक बयान में कहा कि ईरानी मिसाइलों से रास लफ्फान साइट पर “व्यापक क्षति” (extensive damage) हुई है। हमले से आग लग गई, जिसे कतर की सिविल डिफेंस टीमों ने काबू किया, लेकिन प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर को गंभीर नुकसान पहुंचा। कतर सरकार ने इसे अपनी संप्रभुता पर “खुला हमला” करार देते हुए ईरान के सैन्य और सुरक्षा अटैची को 24 घंटे के अंदर देश छोड़ने का आदेश दिया है।

ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इसे “मजबूत चेतावनी” बताया है। ईरान ने पहले ही सऊदी अरब, यूएई और कतर के कई एनर्जी साइट्स को “वैध लक्ष्य” घोषित कर दिया था, जिसमें रास लफ्फान रिफाइनरी और मेसाइद पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स शामिल थे। यह जवाबी कार्रवाई इजरायल के उस हमले के ठीक बाद हुई, जिसमें ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड (जिसका कतर हिस्सा नॉर्थ फील्ड कहलाता है) की प्रोसेसिंग फैसिलिटी को निशाना बनाया गया था। ईरान का दावा है कि अमेरिका-इजरायल ने संयुक्त रूप से यह हमला किया, जिससे गैस उत्पादन प्रभावित हुआ और कुछ रिफाइनरी बंद हो गईं।

वैश्विक प्रभाव

  • तेल और गैस कीमतों में भारी उछाल: ब्रेंट क्रूड $110 प्रति बैरल के पार पहुंच गया।
  • कतर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LNG निर्यातक है (लगभग 20% वैश्विक आपूर्ति)। हमले से उत्पादन ठप होने की आशंका है, जिससे यूरोप, एशिया और भारत में गैस संकट गहरा सकता है।
  • सऊदी अरब ने भी ईरानी मिसाइलों को रोकने का दावा किया है, जबकि यूएई ने अल होस्न गैस फील्ड पर हमले की निंदा की।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इजरायल ने साउथ पार्स पर हमला किया था, लेकिन अमेरिका को इसकी जानकारी नहीं थी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान आगे कतर पर हमला करता रहा तो अमेरिका-इजरायल मिलकर साउथ पार्स फील्ड को पूरी तरह नष्ट कर देंगे।

कतर के विदेश मंत्रालय ने दोनों हमलों (इजरायल और ईरान) की निंदा की और इसे “खतरनाक वृद्धि” बताया। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्ध अब ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित हो गया है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य की नेविगेशन पहले से ज्यादा जोखिम भरी हो गई है।

स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय डी-एस्केलेशन की अपील कर रहा है, लेकिन दोनों पक्षों से कोई पीछे हटने का संकेत नहीं मिल रहा।

Sanjeevni Today
Author: Sanjeevni Today

Reporter

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