पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ी राहत वाली खबर सामने आई है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) पूरी तरह बंद नहीं है, बल्कि यह केवल अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों के लिए बंद किया गया है। बाकी सभी देशों, खासकर भारत जैसे मित्र राष्ट्रों के टैंकरों और जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी जा रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को दिए एक इंटरव्यू में साफ कहा, “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला है। यह केवल हमारे दुश्मनों – जो हम पर हमला कर रहे हैं – और उनके सहयोगियों के जहाजों के लिए बंद है।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई गुजरती है। फरवरी अंत में अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर सख्त निगरानी और आंशिक नाकेबंदी लगा दी थी, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल-गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं और भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में LPG संकट गहरा गया है।
भारत को विशेष राहत और कूटनीतिक सफलता ईरान ने भारत के साथ अपने पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का हवाला देते हुए भारतीय झंडे वाले जहाजों को स्पेशल छूट दी है। ईरान के भारत में राजदूत मोहम्मद फताली ने पुष्टि की कि “भारत हमारा दोस्त है, हमारे हित साझा हैं, इसलिए भारतीय जहाजों को होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी जा रही है।” भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने भी बताया कि हाल ही में दो भारतीय LPG टैंकर – शिवालिक और नंदा देवी – ने भारतीय नौसेना की सुरक्षा में होर्मुज को सफलतापूर्वक पार किया है। ये टैंकर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के लिए भारी मात्रा में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं, जो 16-17 मार्च तक पहुंच जाएंगे।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हाल के दिनों में कई फोन बातचीत हुई, जिसमें शिपिंग सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस रहा। सूत्रों के मुताबिक, इन बातचीत के बाद ईरान ने भारत के लिए अनौपचारिक रूप से सुरक्षित मार्ग की गारंटी दी। फिलहाल होर्मुज के पश्चिम में 22 भारतीय जहाज (जिनमें 6 LPG कैरियर, 1 LNG और 4 क्रूड ऑयल टैंकर शामिल) फंसे हुए हैं, जिनके लिए भारत सुरक्षित निकासी की मांग कर रहा है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और इसका करीब 40 प्रतिशत कच्चा तेल आयात होर्मुज से होकर आता है। हालांकि, संकट के बीच सरकार ने रणनीतिक बदलाव किए हैं – अब कुल आयात का 70 प्रतिशत हिस्सा वैकल्पिक रूट्स (जैसे अफ्रीका, रूस आदि से) से लाया जा रहा है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल, डीजल और एविएशन फ्यूल के स्टॉक पर्याप्त हैं, लेकिन LPG पर सबसे ज्यादा दबाव है, जहां आयात निर्भरता अधिक है। इन दो टैंकरों के आने से घरेलू गैस संकट में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर जयपुर जैसे शहरों में जहां हाल ही में ऑटो-रिक्शा और घरेलू उपयोगकर्ता प्रभावित हुए थे।
वैश्विक प्रभाव और ईरान का रुख ईरान ने साफ किया कि नाकेबंदी केवल “दुश्मन देशों” तक सीमित है। विदेश मंत्री अराघची ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि वाशिंगटन अब भारत से रूसी तेल खरीदने की गुहार लगा रहा है, जबकि पहले भारत को रूस से तेल लेने से रोकने की कोशिश की थी। ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-इजरायल के जहाजों पर सख्त कार्रवाई होगी।
निष्कर्ष में यह ईरान-भारत कूटनीति की बड़ी जीत है, जो दिखाती है कि पुराने संबंध आज के संकट में भी काम आ सकते हैं। हालांकि, स्थिति नाजुक है और अगर तनाव बढ़ा तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर और असर पड़ेगा। भारत सरकार ने लोगों से घबराने की जरूरत नहीं बताई है, लेकिन वैकल्पिक स्रोतों से सप्लाई बढ़ाने और स्टॉक मैनेज करने पर जोर दिया है। उम्मीद है कि जल्द ही बाकी फंसे जहाज भी सुरक्षित निकल आएंगे और तेल-गैस की सप्लाई सामान्य हो जाएगी।






