इंदौर, 1 जनवरी 2026: देश के लगातार आठ बार सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीतने वाले मध्य प्रदेश के इंदौर में बड़ा जल संकट खड़ा हो गया है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा नदी की पाइपलाइन में ड्रेनेज और सीवरेज का पानी मिलने से सप्लाई का पानी दूषित हो गया। इससे उल्टी-दस्त की महामारी फैल गई, जिसमें अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है और 1000 से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए हैं।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि भागीरथपुरा पुलिस चौकी के पास बने एक सार्वजनिक शौचालय के ठीक नीचे नर्मदा की मुख्य पाइपलाइन में लीकेज था। शौचालय का गंदा पानी सीधे पेयजल लाइन में मिल रहा था, जिससे पूरे इलाके में जहरीला पानी पहुंच गया। नगर निगम की लापरवाही सामने आई है, क्योंकि यह समस्या कई हफ्तों से थी और स्थानीय लोग गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे।
मौतों और बीमारियों का आंकड़ा
- मौतें: 8 (कुछ रिपोर्ट्स में 7-10 तक, इसमें महिलाएं और एक 6 महीने का बच्चा शामिल)
- अस्पताल में भर्ती: 150 से ज्यादा
- कुल प्रभावित: 1000 से अधिक लोग उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन के शिकार
- सर्वे: 2700 घरों में 12,000 लोगों की जांच, जिसमें हजारों में लक्षण पाए गए
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अस्पतालों का दौरा किया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान किया। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी मरीजों से मुलाकात की।
प्रशासन की कार्रवाई
- तीन अधिकारियों पर गाज: एक बर्खास्त, दो सस्पेंड
- जांच कमेटी गठित: आईएएस अधिकारी की अगुवाई में
- हाईकोर्ट का हस्तक्षेप: मरीजों का मुफ्त इलाज और 2 जनवरी तक स्टेटस रिपोर्ट मांगी
- पानी सप्लाई रोकी: पाइपलाइन रिपेयर के बाद बहाल, लेकिन शुक्रवार तक नल का पानी इस्तेमाल न करने की सलाह
- टैंकरों से पानी: 100 से ज्यादा टैंकर भेजे गए
मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि लापरवाहों को बख्शा नहीं जाएगा। विपक्षी कांग्रेस ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और एफआईआर की मांग की।
ह घटना इंदौर की स्वच्छता की छवि पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। प्रशासन ने इलाके में मेडिकल कैंप लगाए हैं और सभी अस्पतालों को अलर्ट पर रखा है। नए साल की शुरुआत में शहर में जश्न की जगह मातम पसरा हुआ है। जल्द ही और जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद है।






