Explore

Search

February 7, 2026 3:26 am

ट्रेड वॉर में भारत की जीत: अमेरिका-ईयू के बीच फंसा भारत बना ‘ग्लोबल प्लेयर’, दोनों शक्तियों से हासिल की ऐतिहासिक डील

WhatsApp
Facebook
Twitter
Email

एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की दक्षिण एशिया विशेषज्ञ फारवा आमेर ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ताएं लंबे समय से चल रही थीं, लेकिन इसे अंतिम रूप देने और फाइनल करने में ईयू (यूरोपीय संघ) की भूमिका अहम रही। ईयू के साथ भारत के हालिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) ने अमेरिका पर दबाव बनाया, जिससे वह किसी बड़े नुकसान से बचने के लिए जल्दबाजी में समझौता फाइनल करने को मजबूर हुआ।

ईयू-FTA के बाद अमेरिका की तेजी

फारवा आमेर ने कहा, “भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताएं काफी समय से चल रही थीं, लेकिन ईयू के साथ डील ने अमेरिका को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।” उन्होंने इसकी टाइमिंग को बहुत दिलचस्प बताया, क्योंकि भारत-अमेरिका समझौता ईयू-FTA के ठीक बाद आनन-फानन अमल में आया। यह संकेत देता है कि अमेरिका नहीं चाहता था कि भारत यूरोप के साथ मजबूत व्यापारिक संबंधों से अमेरिकी बाजार में अपनी स्थिति कमजोर हो।

हाल ही में भारत और ईयू ने लंबे इंतजार के बाद मुक्त व्यापार समझौता फाइनल किया था, जिससे भारत के निर्यात को यूरोपीय बाजार में टैरिफ छूट मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ अमेरिका के साथ बातचीत में लीवरेज भी प्रदान करती है।

रूस का सवाल अभी बरकरार

फारवा आमेर ने रूस के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत ने तेल आयात के ढांचे में बदलाव लाकर रूस से तेल खरीद को कम कर दिया है, लेकिन रूस से संबंध बनाए रखना भारत की रणनीति का हिस्सा रहेगा। “रूस का सवाल भारत के लिए बना हुआ है। भले ही तेल आयात कम हो रहा है, लेकिन भारत रूस के साथ स्थिर संबंध चाहेगा,” आमेर ने जोर दिया।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने पहले रूसी तेल खरीद पर भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए थे, लेकिन हालिया समझौते में टैरिफ को 25% से घटाकर 18% किया गया। ट्रंप प्रशासन ने दावा किया कि भारत रूसी तेल खरीद बंद करने को तैयार है, लेकिन भारत की ओर से इस पर स्पष्ट टिप्पणी नहीं आई।

समझौते का महत्व

यह व्यापार समझौता भारत-अमेरिका संबंधों में रीसेट का संकेत दे रहा है। इससे भारतीय निर्यातकों को राहत मिलेगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां टैरिफ का बोझ था। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि डील के डिटेल्स अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं और रूस जैसे मुद्दे भविष्य में फिर चुनौती बन सकते हैं।

DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

ताजा खबरों के लिए एक क्लिक पर ज्वाइन करे व्हाट्सएप ग्रुप

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर