डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 में भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में अपनी मजबूत स्थिति और रणनीति को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखा। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उच्चस्तरीय पैनल चर्चा “AI Power Play, No Referees” में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने AI की वैश्विक राजनीति, आर्थिक प्रभाव, शासन चुनौतियों और समावेशी उपयोग पर विचार रखे।
मुख्य हाइलाइट्स:
- भारत पहले ग्रुप में: IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जिवा ने भारत को “सेकंड-टियर” AI पावर बताया (US, चीन जैसे टॉप टियर के नीचे), लेकिन वैष्णव ने इसे खारिज करते हुए कहा कि भारत “क्लियरली फर्स्ट ग्रुप” में है। उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की रैंकिंग का हवाला दिया, जहां भारत AI preparedness में तीसरा, AI talent में दूसरा और AI penetration में मजबूत स्थान पर है।
- AI पावर मॉडल साइज से नहीं आती: वैष्णव ने कहा कि बहुत बड़े लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) बनाने से जियोपॉलिटिकल एज नहीं मिलती। ऐसे मॉडल बंद हो सकते हैं या आर्थिक रूप से असफल हो सकते हैं। असली पावर डिप्लॉयमेंट और ROI (रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट) से आती है। भारत में 95% AI काम 20-50 बिलियन पैरामीटर वाले मॉडल्स से हो रहा है।
- भारत की 5-लेयर AI स्ट्रैटेजी:
- एप्लीकेशन लेयर – रियल-वर्ल्ड वैल्यू क्रिएशन (जनता और इंडस्ट्री तक पहुंच)।
- मॉडल लेयर – अपना बोके ऑफ मॉडल्स।
- चिप लेयर – सेमीकंडक्टर प्रोग्रेस।
- इंफ्रास्ट्रक्चर लेयर – 38,000 GPUs का पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप कम्यूट फैसिलिटी (स्टूडेंट्स, रिसर्चर्स, स्टार्टअप्स को ग्लोबल कॉस्ट का एक-तिहाई दाम पर उपलब्ध)।
- एनर्जी लेयर – सस्टेनेबल पावर।
- समावेशी और कम लागत वाला AI: भारत AI को तेजी से अपनाने के साथ-साथ इसे आम लोगों तक पहुंचाने और कम लागत में ज्यादा फायदा देने पर फोकस कर रहा है। सरकार टेक्नो-लीगल गवर्नेंस (तकनीकी टूल्स + कानूनी फ्रेमवर्क) पर जोर दे रही है, जैसे बायस और डीपफेक डिटेक्शन सिस्टम।
- पैनल में अन्य: ब्रैड स्मिथ (माइक्रोसॉफ्ट), क्रिस्टालिना जॉर्जिवा (IMF), खालिद अल-फलिह (सऊदी अरब), मॉडरेटर इयान ब्रेमर।
यह पैनल 20 जनवरी 2026 को हुआ, और वैष्णव के बयानों ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी। भारत AI में न सिर्फ अपनाने वाला बल्कि लीडर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है—फोकस बड़े मॉडल्स पर नहीं, बल्कि प्रोडक्टिविटी, इकोनॉमिक वैल्यू और समावेशी विकास पर है।






