अमेरिका ने भारत के रूसी तेल प्रतिबंधों के पालन की सराहना की है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने के लिए रूसी तेल पर कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने की संभावना जताई है। यह घटनाक्रम मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान-इज़राइल संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट के कारण तेल आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव के बीच आया है, जिससे वैश्विक तेल कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने फॉक्स बिजनेस के कार्यक्रम “कुडलो” में भारत को “बहुत अच्छा एक्टर” (very good actor) बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने इस गर्मी/पतझड़ में भारत से प्रतिबंधित रूसी तेल की खरीद पूरी तरह रोकने का अनुरोध किया था, और भारत ने इसका सख्ती से पालन किया। बेसेंट ने कहा, “भारतीय बहुत अच्छे एक्टर्स रहे हैं। हमने उनसे प्रतिबंधित रूसी तेल खरीदना बंद करने को कहा था, उन्होंने ठीक वैसा ही किया।”
इस सहयोग के बदले अमेरिका ने ऑफिस ऑफ फॉरेन असेट्स कंट्रोल (OFAC) के माध्यम से भारत को एक 30 दिनों की अस्थायी छूट (waiver) दी है। यह छूट 5 मार्च 2026 तक जहाजों पर लदे रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की डिलीवरी और खरीद पर लागू है, जो वर्तमान में समुद्र में फंसे हुए हैं। यह छूट 4 अप्रैल 2026 तक वैध है। बेसेंट ने स्पष्ट किया कि यह “जानबूझकर अल्पकालिक उपाय” है, जिससे रूस को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं होगा, क्योंकि यह केवल पहले से लदे कार्गो पर लागू है।
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका अन्य रूसी तेल कार्गो पर भी प्रतिबंधों में ढील (“unsanction”) देने पर विचार कर रहा है, ताकि वैश्विक तेल आपूर्ति में अस्थायी कमी को रोका जा सके और ऊर्जा बाजार स्थिर रहे। बेसेंट ने उम्मीद जताई कि भारत भविष्य में अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा, क्योंकि भारत अमेरिका का महत्वपूर्ण साझेदार है।
यह कदम पिछले कुछ महीनों में अमेरिका की नीति में बदलाव दर्शाता है। पहले अमेरिका भारत पर रूसी तेल खरीद के लिए दबाव बना रहा था और यहां तक कि जुर्माना टैरिफ भी लगाए गए थे, लेकिन मध्य पूर्व संकट (ईरान के साथ तनाव, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की भीड़ और आपूर्ति बाधा) के कारण अब व्यावहारिक राहत दी जा रही है।






