यह खबर बीबीसी हिंदी की एक हालिया रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें दावा किया गया है कि भारत ने बांग्लादेश को ‘नॉन-फैमिली’ डिप्लोमैटिक पोस्टिंग (Non-Family Posting) के रूप में वर्गीकृत कर दिया है। इसका मतलब है कि अब बांग्लादेश में तैनात भारतीय राजनयिकों, अधिकारियों और दूतावास कर्मचारियों को अपने परिवार (पति/पत्नी और बच्चे) के साथ रहने की अनुमति नहीं होगी।
मुख्य बिंदु इस फैसले के:
- लागू होने की तारीख: 1 जनवरी 2026 से प्रभावी।
- परिवारों की वापसी: बांग्लादेश में मौजूद भारतीय अधिकारियों के परिवारों को 8 जनवरी 2026 तक भारत लौटने का निर्देश दिया गया है। कुछ मामलों में स्कूल जाने वाले बच्चों को 7 दिनों की अतिरिक्त छूट दी गई।
- पहले से शामिल देश: पहले यह श्रेणी केवल कुछ उच्च जोखिम वाले देशों पर लागू थी, जैसे इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दक्षिण सूडान।
- कारण: रिपोर्ट्स में सुरक्षा चिंताओं (security concerns) का जिक्र है, खासकर बांग्लादेश में हाल की राजनीतिक अस्थिरता, अल्पसंख्यकों (विशेषकर हिंदुओं) पर हमलों और भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव के संदर्भ में। यह फैसला शेख हसीना की सरकार के गिरने के बाद के हालात से जुड़ा लगता है, जहां अंतरिम सरकार (मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में) के दौरान हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं।
यह फैसला भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन बीबीसी और अन्य मीडिया स्रोतों (जैसे TV9 हिंदी, Fourth Eye News आदि) ने सूत्रों के हवाले से इसकी पुष्टि की है।
संदर्भ में भारत-बांग्लादेश संबंध:
हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है:
- अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर भारत ने चिंता जताई।
- दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के दूतावासों की सुरक्षा पर सवाल उठाए और राजनयिकों को तलब किया।
- वीजा सेवाओं में प्रतिबंध और बॉर्डर पर तनाव जैसे मुद्दे सामने आए।
यह कदम राजनयिक स्तर पर सख्ती का संकेत है, जो सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। हालांकि, यह दोनों देशों के बीच संबंधों को और जटिल बना सकता है, खासकर बांग्लादेश में आगामी चुनावों (फरवरी 2026) से पहले






