नई दिल्ली: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भारत को बड़ी सफलता मिली है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को बताया कि इस समिट में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर आदि) के लिए 250 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश हासिल हुआ है। साथ ही, ‘दिल्ली घोषणापत्र’ (Delhi Declaration) पर अब तक 70 से ज्यादा देशों ने हस्ताक्षर किए हैं, और यह संख्या शनिवार को समिट के समापन तक 80 के पार पहुंच सकती है।
क्या है ये बड़ा निवेश?
- समिट में रिलायंस, अडानी, माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों ने भारी-भरकम कमिटमेंट्स दिए हैं।
- रिलायंस और जियो ने अगले 7 सालों में 110 अरब डॉलर का निवेश करने का ऐलान किया।
- अडानी ग्रुप ने 2035 तक एआई डेटा सेंटर के लिए 100 अरब डॉलर का प्लान बताया।
- कुल मिलाकर, अगले दशक में भारत में 250 अरब डॉलर का एआई इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम तैयार होने की उम्मीद है।
- इसके अलावा, वेंचर कैपिटल और डीप टेक में भी करीब 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धताएं आई हैं।
दिल्ली घोषणापत्र क्या है?
यह एक साझा बयान है जिसमें दुनिया के देश एआई के फायदों को सभी के लिए साझा करने, जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने, नैतिकता और सुरक्षा पर जोर देते हैं।
- पिछले समिट्स (जैसे पेरिस, सियोल) में इतने ज्यादा देशों ने हस्ताक्षर नहीं किए थे।
- इस बार अमेरिका, ब्रिटेन सहित सभी प्रमुख देशों ने सहमति जताई है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मनुष्य एआई’ (Manav AI) विजन – यानी AI इंसानों के लिए, इंसानों द्वारा और इंसानों की भलाई के लिए – को वैश्विक समर्थन मिला है।
समिट की अन्य खास बातें
- समिट में 5 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए।
- वैष्णव ने इसे ‘ग्रैंड सक्सेस’ बताया और कहा कि भारत अब एआई के नए युग में वैश्विक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
- सरकार जल्द ही एआई मिशन 2.0 लॉन्च करेगी, जिसमें नए मॉडल, कॉमन कंप्यूट और सेफ्टी पर फोकस होगा।
यह समिट भारत के लिए एआई क्षेत्र में बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ है, जहां निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग दोनों में रिकॉर्ड बन गया। वैष्णव ने कहा, “संख्याएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इससे ज्यादा जरूरी है दुनिया का भारत पर भरोसा।”






