मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार को हिला दिया है। Strait of Hormuz (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) में जहाजों पर हमले, ईरान की ओर से तेल निर्यात में रुकावट और ग्लोबल सप्लाई चेन डिसरप्शन के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल $100-106 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। इस संकट की सबसे ज्यादा मार पड़ रही है पाकिस्तान पर, जहां सरकार ने 7 मार्च 2026 को पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमतों में रेकॉर्ड 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की। यह देश के इतिहास में एक साथ सबसे बड़ी सिंगल हाइक है – करीब 20% की वृद्धि!
नई कीमतें (7 मार्च 2026 से लागू, एक्स-डिपो रेट्स):
- पेट्रोल (मोटर स्पिरिट): 321.17 PKR प्रति लीटर (पहले 266.17 PKR, +55 PKR या +20.7%)
- हाई-स्पीड डीजल (HSD): 335.86 PKR प्रति लीटर (पहले 280.86 PKR, +55 PKR या +19.6%)
पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने टीवी पर घोषणा करते हुए कहा, “यह फैसला मजबूरी में लिया गया है क्योंकि ग्लोबल तेल कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। ईरान संघर्ष के कारण Strait of Hormuz में सप्लाई बाधित हो गई है, और पाकिस्तान 80% से ज्यादा तेल इंपोर्ट करता है।” डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री इशाक डार ने भी कहा कि यह बढ़ोतरी वैश्विक बाजार की अस्थिरता का सीधा नतीजा है।
जनता में हाहाकार और पैनिक
- पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें: कराची, लाहौर, इस्लामाबाद में लोग रातों-रात पंपों पर पहुंचे। कई जगहों पर पैनिक बाइंग से फ्यूल स्टेशनों पर मारामारी और लूटपाट जैसी अफरा-तफरी मची।
- ट्रांसपोर्ट ठप: ट्रांसपोर्टर्स ने किराए 30-50% बढ़ा दिए। पब्लिक ट्रांसपोर्ट, ट्रकिंग और राइड-शेयरिंग सर्विसेज प्रभावित। किसानों को फसल सीजन में डीजल महंगा पड़ रहा है।
- महंगाई का डर: अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अगर क्रूड $130 तक पहुंचा तो इन्फ्लेशन 7% से ज्यादा हो सकती है। पहले से ही महंगाई से जूझ रहे पाकिस्तान में घरेलू बजट पर बोझ बढ़ गया। लोग कह रहे हैं, “यह पेट्रोल बम है, जेब पर सीधा हमला!”
- रमजान और ईद से पहले झटका: ईद-उल-फित्र नजदीक है, लेकिन फ्यूल महंगा होने से यात्रा और शॉपिंग पर असर।
सरकार के ऑस्टेरिटी मेजर्स
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इमरजेंसी घोषणा की:
- सरकारी दफ्तरों में 4-डे वीक (शुक्रवार छुट्टी)।
- स्कूलों में स्प्रिंग ब्रेक 16 मार्च से महीने भर।
- सरकारी वाहनों में 60% कटौती (एम्बुलेंस और बसें छोड़कर)।
- फ्यूल अलाउंस 50% कम।
- गैर-जरूरी सरकारी खर्च बंद।
ये कदम दो महीने के लिए हैं, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर युद्ध लंबा चला तो और सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं। पाकिस्तान के पास सिर्फ 28 दिनों का ऑयल स्टॉक है – कोई स्ट्रैटेजिक रिजर्व नहीं, इसलिए यह संकट और गहरा सकता है।
वैश्विक संदर्भ और पाकिस्तान की कमजोरी
पाकिस्तान 80% से ज्यादा तेल मिडिल ईस्ट से इंपोर्ट करता है। Strait of Hormuz बंद होने से सप्लाई चेन टूट गई। भारत और अन्य देशों में कीमतें स्थिर हैं क्योंकि उनके पास बेहतर रिजर्व और डाइवर्सिफाइड सोर्स हैं, लेकिन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से IMF लोन, डेब्ट और इन्फ्लेशन से जूझ रही है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: अगर क्रूड $130 पहुंचा तो पेट्रोल 392 PKR तक जा सकता है, और इन्फ्लेशन 7%+। सरकार ने कहा है कि वैश्विक कीमतें घटने पर रिव्यू करेंगे, लेकिन फिलहाल राहत की कोई उम्मीद नहीं।
यह संकट पाकिस्तान की ऊर्जा नीति की कमजोरियों को उजागर कर रहा है – इंपोर्ट निर्भरता, कम रिजर्व और राजनीतिक अस्थिरता। जनता सड़कों पर उतर रही है, और सियासत गर्म हो रही है। क्या यह युद्ध पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को और गहराई में ले जाएगा? अपडेट्स के लिए बने रहें।






