कोलंबो/नई दिल्ली, 21 फरवरी 2026: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में जिम्बाब्वे ने वो कर दिखाया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। एसोसिएट नेशन होने के बावजूद उन्होंने मैदान पर पसीना बहाकर ग्रुप बी में अजेय रहते हुए टॉप किया। ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और ओमान जैसे मजबूत टीमों को हराकर (या बेहतर प्रदर्शन से) उन्होंने सुपर-8 का टिकट कटवाया, लेकिन ICC की ‘प्री-सीडिंग’ व्यवस्था ने उनके इस ऐतिहासिक प्रदर्शन को एक तरह से ‘सजा’ में बदल दिया।
जिम्बाब्वे ने ग्रुप स्टेज में श्रीलंका को हराकर फाइनल मैच जीता और पूरे ग्रुप में टॉप पर रहे। इससे पहले उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को भी हराया था, जिससे ऑस्ट्रेलिया बाहर हो गया। लेकिन ICC के प्री-सीडिंग सिस्टम के तहत सुपर-8 के ग्रुप पहले से तय थे – जहां ग्रुप विनर्स (A1, B1, C1, D1) को एक ही ग्रुप में डाल दिया गया। नतीजा? इंडिया, साउथ अफ्रीका, वेस्ट इंडीज और जिम्बाब्वे – ये चारों ग्रुप टॉपर्स अब एक ही ‘ग्रुप ऑफ डेथ’ में हैं, जबकि रनर-अप टीमों (पाकिस्तान, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, श्रीलंका) को दूसरा ग्रुप मिला, जो अपेक्षाकृत आसान है।
क्या है प्री-सीडिंग विवाद?
- ICC ने टूर्नामेंट से पहले ही टॉप टीमों को फिक्स स्लॉट दिए थे (जैसे इंडिया X1, ऑस्ट्रेलिया X2 आदि)।
- अगर कोई टीम क्वालीफाई नहीं करती, तो उसकी जगह लेने वाली टीम उसी स्लॉट में आ जाती है। जिम्बाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया की जगह ली और ग्रुप X में पहुंच गए।
- इससे सभी ग्रुप विनर्स एक ग्रुप में आ गए, जिससे दो मजबूत टीमें सेमीफाइनल से पहले ही बाहर हो सकती हैं, जबकि रनर-अप टीमों को आसान रास्ता मिल रहा है।
- फैंस और एक्सपर्ट्स इसे ‘अनफेयर’ और ‘टोटल इनकंपिटेंस’ बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर ICC की खूब आलोचना हो रही है – कुछ का कहना है कि यह फॉर्मेट इंडिया-पाकिस्तान सेमीफाइनल सेटअप के लिए बनाया गया है।
सुपर-8 ग्रुप्स (वर्तमान स्थिति):
- ग्रुप 1 (ग्रुप ऑफ डेथ): इंडिया, जिम्बाब्वे, वेस्ट इंडीज, साउथ अफ्रीका
- ग्रुप 2: पाकिस्तान, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, श्रीलंका (या अन्य रनर-अप)
जिम्बाब्वे के कोच और खिलाड़ी इस उपलब्धि पर गर्व कर रहे हैं, लेकिन फैंस पूछ रहे हैं – क्या इतना शानदार प्रदर्शन करने वाली टीम को इतनी कठिन राह मिलनी चाहिए? ICC ने अभी कोई जवाब नहीं दिया है, लेकिन विवाद बढ़ता जा रहा है।
जिम्बाब्वे की इस सफलता ने क्रिकेट में एसोसिएट टीमों की ताकत दिखाई है, लेकिन ICC के फॉर्मेट ने इसे विवादास्पद बना दिया। अब सुपर-8 में देखना होगा कि जिम्बाब्वे इस ‘कुर्सी’ को कितनी दूर तक ले जाते हैं। क्रिकेट प्रेमियों की नजर अब इन मैचों पर टिकी है!






