बांदा, 21 फरवरी 2026: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की विशेष POCSO अदालत ने एक बेहद जघन्य मामले में सिंचाई विभाग के निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को मौत की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस अपराध को ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (rarest of rare) श्रेणी में रखते हुए दोनों को मरते दम तक फांसी के फंदे पर लटकाए रखने का आदेश दिया। यह फैसला 20 फरवरी 2026 को विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने सुनाया, जिसमें दोनों को भारतीय दंड संहिता (IPC), POCSO एक्ट और आईटी एक्ट की कई धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया।
अपराध का खौफनाक सिलसिला (2010-2020)
- मुख्य आरोपी रामभवन उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात था। उसकी पोस्टिंग हमीरपुर, बांदा और चित्रकूट जिलों में रही, जहां से वह अंतिम बार चित्रकूट से गिरफ्तार हुआ।
- साल 2010 से 2020 तक (करीब 10 वर्षों में) रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती ने 33 से 50 नाबालिग बच्चों (कुछ मात्र 3 साल के) का यौन शोषण किया। ये बच्चे मुख्य रूप से गरीब परिवारों से थे और बांदा, चित्रकूट तथा आसपास के जिलों के रहने वाले थे।
- बच्चों को बहकाने के लिए आरोपी ऑनलाइन वीडियो गेम, पैसे, चॉकलेट, घड़ी, मोबाइल फोन और अन्य गिफ्ट्स का लालच देते थे। शोषण के दौरान वीडियो और फोटो रिकॉर्ड किए जाते थे।
- जांच में पता चला कि इन अश्लील वीडियो और फोटोज को डार्क वेब पर बेचा जाता था, जहां 45-47 देशों के खरीदार थे। सीबीआई ने पेन ड्राइव से 34 बच्चों के वीडियो और 679 फोटो बरामद किए, साथ ही 8 मोबाइल, लैपटॉप, सेक्स टॉयज और नकदी भी जब्त की।
जांच और कोर्ट प्रक्रिया
- मामला अक्टूबर 2020 में तब सामने आया जब इंटरपोल ने सीबीआई को डार्क वेब पर बच्चों के पोर्नोग्राफिक कंटेंट की सूचना दी। सीबीआई ने 31 अक्टूबर 2020 को केस दर्ज किया।
- रामभवन को 16-18 नवंबर 2020 में चित्रकूट से गिरफ्तार किया गया, जबकि पत्नी दुर्गावती को बाद में पकड़ा गया। दुर्गावती पर गवाहों पर दबाव बनाने का भी आरोप साबित हुआ।
- ट्रायल में 74 गवाह पेश हुए, जिसमें पीड़ित बच्चों की गवाही, फॉरेंसिक रिपोर्ट्स (AIIMS से), डिजिटल सबूत और मेडिकल जांच शामिल थे।
- 18 फरवरी 2026 को दोनों को दोषी ठहराया गया, और 20 फरवरी को सजा सुनाई गई।
कोर्ट का फैसला और मुआवजा
- कोर्ट ने कहा कि यह अपराध योजनाबद्ध, क्रूर और समाज के लिए बेहद खतरनाक था। बच्चों पर शारीरिक-मानसिक चोटें गंभीर थीं।
- प्रत्येक पीड़ित बच्चे को उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से 10-10 लाख रुपये (कुल 20 लाख) का मुआवजा देने का आदेश।
- आरोपी के घर से बरामद नकदी को भी पीड़ितों में बांटने का निर्देश।
- कोर्ट ने कहा, “दोनों को तब तक फंदे पर लटकाए रखा जाए, जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए।”
यह फैसला बाल सुरक्षा और POCSO कानून के सख्त प्रवर्तन की मिसाल है। सीबीआई की जांच ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस रैकेट को उजागर किया। पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की यह जीत है, लेकिन समाज को ऐसे दरिंदों से बचाने के लिए और सतर्कता की जरूरत है।






