नई दिल्ली। आमतौर पर जब दुनिया में युद्ध या तनाव की स्थिति बनती है तो सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार हालात कुछ अलग हैं। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बावजूद सोने और चांदी के दाम बढ़ने के बजाय गिर गए हैं। इससे निवेशकों के साथ-साथ आम लोगों के मन में भी सवाल उठ रहा है कि आखिर जंग के माहौल में भी गोल्ड और सिल्वर सस्ते क्यों हो रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई आर्थिक कारणों की वजह से सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती को माना जा रहा है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोने में निवेश कम हो जाता है, क्योंकि निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर डॉलर को चुनते हैं। इसी वजह से सोने की मांग में कमी आई है और कीमतों में गिरावट देखी जा रही है।
दूसरी बड़ी वजह ब्याज दरों को लेकर चल रही अनिश्चितता है। अमेरिका और अन्य बड़े देशों के केंद्रीय बैंक अभी भी महंगाई को काबू में रखने के लिए सख्त नीतियां अपना रहे हैं। ब्याज दरें ऊंची रहने से लोग सोने में पैसा लगाने के बजाय बैंक और बॉन्ड जैसे विकल्पों में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। इसका असर भी सोने-चांदी के दाम पर पड़ा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय बाजार का ध्यान सिर्फ युद्ध पर नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, कच्चे तेल की कीमतें, और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की स्थिति जैसे कई फैक्टर मिलकर गोल्ड और सिल्वर के रेट तय करते हैं। इस बार इन फैक्टर्स का असर ज्यादा दिख रहा है, इसलिए जंग के बावजूद कीमतों में उछाल नहीं आया।
भारत में भी सोने-चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। ज्वेलर्स का कहना है कि कीमत कम होने से बाजार में खरीदारी थोड़ी बढ़ी है, लेकिन निवेशक अभी भी सावधानी बरत रहे हैं। शादी-ब्याह के सीजन को देखते हुए लोगों को सस्ते दाम का फायदा मिल सकता है।
बाजार जानकारों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चलता है या वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं तो आने वाले दिनों में सोने के दाम फिर बढ़ सकते हैं। फिलहाल बाजार अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है और इसी वजह से कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है।






