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March 20, 2026 4:46 pm

गुजरात में गैस की किल्लत, प्रवासी मजदूर गांव लौट रहे: सिलेंडर ₹5 हजार में, फ्लैट में चूल्हा नहीं जल रहा

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गुजरात में घरेलू रसोई गैस की गंभीर किल्लत ने आम लोगों और प्रवासी मजदूरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹5 हजार तक पहुंच गई है, जिससे फ्लैट में खाना बनाना नामुमकिन सा हो गया है। इस संकट के बीच, कई प्रवासी मजदूर अपने गांवों की ओर लौटने लगे हैं, क्योंकि शहर में रहना और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना उनके लिए अब महंगा और मुश्किल हो गया है।

सिलेंडर की बढ़ती कीमतें

स्थानीय बाजारों और रसोई गैस की दुकानों से मिली जानकारी के अनुसार, सिलेंडर की उपलब्धता बेहद कम है। कीमतें बढ़कर लगभग ₹5 हजार तक पहुंच गई हैं, जबकि सरकारी दरों पर एलपीजी सिलेंडर की कीमत आम तौर पर बहुत कम होती है। दुकानदारों का कहना है कि सप्लाई चेन में दिक्कत के कारण यह संकट पैदा हुआ है।

प्रवासी मजदूरों की वापसी

कई प्रवासी मजदूर जो शहरों में काम कर रहे थे, अब मजबूरी में अपने गांव लौट रहे हैं। उनका कहना है कि फ्लैट में खाना बनाना मुश्किल हो गया है और दैनिक खर्च बढ़ गया है। मजदूरों का कहना है, “सिलेंडर इतना महंगा हो गया है कि इसे रोजमर्रा के काम के लिए इस्तेमाल करना संभव नहीं। इसलिए अपने गांव लौटना ही बेहतर है।”

आम नागरिकों की परेशानी

सिर्फ प्रवासी मजदूर ही नहीं, बल्कि शहरों में रहने वाले आम नागरिक भी इस संकट से परेशान हैं। कई परिवारों ने बताया कि अब उन्हें गैस के बिना ही खाना बनाना पड़ रहा है। कुछ लोग इलेक्ट्रिक रसोई का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन बिजली की बढ़ती खपत और उपकरणों की सीमित क्षमता के कारण यह स्थायी समाधान नहीं है।

प्रशासन और सप्लाई की स्थिति

अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने एलपीजी कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि आपूर्ति को बढ़ाया जाए और मूल्य स्थिर रखने के उपाय किए जाएं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि तुरंत समाधान मुश्किल है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में वृद्धि और सप्लाई चेन में व्यवधान मुख्य कारण हैं।

भविष्य की चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति यथावत रही तो आने वाले महीनों में शहरों में रसोई गैस की किल्लत और बढ़ सकती है। इसके साथ ही प्रवासी मजदूरों की गांव वापसी का सिलसिला जारी रह सकता है। इससे न केवल उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा, बल्कि शहरों में श्रम शक्ति की कमी भी महसूस की जा सकती है।

निष्कर्ष

गुजरात में गैस संकट ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि दैनिक जीवन के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता कितना महत्वपूर्ण है। सिलेंडर की बढ़ती कीमतें और सप्लाई की कमी आम लोगों और प्रवासी मजदूरों की जिंदगी को प्रभावित कर रही हैं। प्रशासन को त्वरित कदम उठाकर इस संकट को नियंत्रित करना आवश्यक है, ताकि लोगों को भोजन और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में आसानी हो सके।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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