मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास तेल सप्लाई पर खतरे के बीच पाकिस्तान सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए हाई-ऑक्टेन ईंधन की कीमत में भारी बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले का असर खासतौर पर लग्जरी गाड़ियों पर पड़ेगा, क्योंकि यह ईंधन मुख्य रूप से महंगी कारों में इस्तेमाल होता है।
क्या है पूरा मामला
पाकिस्तान सरकार ने हाई-ऑक्टेन (प्रीमियम) फ्यूल पर लगने वाला लेवी 100 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 300 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। यानी सीधे 200 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी, जो लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि है। यह फैसला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया।
सरकार का कहना है कि यह कदम आर्थिक दबाव कम करने और आम जनता को राहत देने के लिए उठाया गया है, क्योंकि हाई-ऑक्टेन फ्यूल का उपयोग ज्यादातर महंगी और लग्जरी गाड़ियों में होता है।
होर्मुज संकट से क्यों बढ़ा दबाव
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। पाकिस्तान अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है और यह तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है।
इस रास्ते में किसी भी तरह का खतरा होने से तेल महंगा हो जाता है और पाकिस्तान जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है।
पहले भी बढ़ चुकी हैं कीमतें
इससे पहले मार्च में ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 55 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की गई थी, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम तेजी से बढ़ रहे थे।
आम जनता पर कितना असर
- सरकार के अनुसार इस बढ़ोतरी से बस, ट्रेन या हवाई किराए पर सीधा असर नहीं पड़ेगा
- लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ना तय है
- पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट और महंगाई से जूझ रहा है
निष्कर्ष
होर्मुज संकट और वैश्विक तेल महंगाई ने पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था पर नया दबाव डाल दिया है। सरकार ने बोझ कम करने के लिए लग्जरी गाड़ियों पर इस्तेमाल होने वाले ईंधन को महंगा किया है, लेकिन इसका असर आने वाले समय में पूरी अर्थव्यवस्था पर दिख सकता है।







