मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPIs) की बिकवाली का सिलसिला 2026 में भी जारी है। जनवरी के पहले 16 दिनों में FII ने नेट ₹22,529 करोड़ की बिकवाली की है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि FII अभी भी नेट शॉर्ट पोजिशन में हैं, यानी वे बाजार में गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं और खरीदारी से ज्यादा बिकवाली या शॉर्ट सेलिंग (F&O में गिरावट से फायदा) पर फोकस कर रहे हैं।
जनवरी 2026 में FII आउटफ्लो का आंकड़ा
- कुल नेट सेलिंग: ₹22,529 करोड़ (कैश मार्केट में, 16 जनवरी तक)
- FII लगभग हर दिन सेलर रहे, सिर्फ एक दिन खरीदारी दिखी।
- 2025 में FII ने रिकॉर्ड ₹1.66 लाख करोड़ की बिकवाली की थी, जो भारतीय बाजार में अब तक का सबसे बड़ा सालाना आउटफ्लो है।
- DII (घरेलू संस्थागत निवेशक) ने सपोर्ट किया, लेकिन FII की भारी बिकवाली से बाजार दबाव में रहा।
बाजार का वर्तमान हाल 18 जनवरी 2026 को बाजार मिश्रित बंद हुआ:
- Sensex: 83,570.35 (+187.64 अंक, +0.23%)
- Nifty 50: 25,694.35 (+28.75 अंक, +0.11%)
जनवरी में अब तक Nifty करीब 1.5-1.7% नीचे है, जबकि कई एशियाई बाजार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। FII की बिकवाली से बाजार की अंडरपरफॉर्मेंस जारी है।
FII शॉर्ट क्यों बने हुए हैं? प्रमुख कारण
- उच्च वैल्यूएशन: भारतीय बाजार अभी भी महंगे लग रहे हैं, खासकर कमजोर कमाई ग्रोथ के बीच।
- कमजोर कॉर्पोरेट अर्निंग्स: Q3FY26 (दिसंबर तिमाही) रिजल्ट्स मिक्स्ड उम्मीदें, IT और अन्य सेक्टरों में दबाव।
- ग्लोबल फैक्टर्स: US-India ट्रेड अनिश्चितता, संभावित US टैरिफ, मिडिल ईस्ट टेंशन से ऑयल प्राइस प्रभावित।
- AI ट्रेड का असर: 2025-26 में AI से जुड़े ग्लोबल स्टॉक्स बेहतर कर रहे हैं, जबकि भारत पीछे रह गया।
- कैपिटल फ्लो नॉर्थ एशिया की ओर: कुछ फंड्स चीन/अन्य एशियाई बाजारों में शिफ्ट हो रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
- Geojit Investments के VK Vijayakumar: “FII सेलिंग तब तक जारी रह सकती है जब तक पॉजिटिव ट्रिगर्स न आएं, जैसे बेहतर अर्निंग्स, US-India ट्रेड डील में प्रगति या ग्लोबल रेट कट।”
- अन्य एनालिस्ट्स: 2026 में भारत के मजबूत फंडामेंटल्स (GDP ग्रोथ, बेहतर अर्निंग्स) से FII वापस आ सकते हैं, लेकिन फिलहाल कैशियन बरकरार है।






