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February 19, 2026 2:00 pm

Draft Income Tax Rules: फॉर्म 16 और फॉर्म 26एएस के नंबर बदलने जा रहे हैं, जानिए आप पर पड़ेगा क्या असर

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इनकम टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव! ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 से सैलरीड लोगों का पे स्ट्रक्चर और टैक्स बचत प्रभावित, पुरानी रीजीम फिर आकर्षक हो सकती है

नई दिल्ली: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने हाल ही में ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स, 2026 जारी किए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के साथ जुड़े हैं। ये बदलाव सभी टैक्सपेयर्स पर असर डालेंगे, खासकर सैलरीड क्लास पर। कई नियमों में संशोधन से पे स्ट्रक्चर बदलेगा, छूट बढ़ेंगी और कुछ मामलों में पुरानी टैक्स रीजीम (Old Tax Regime) फिर से ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है।

मुख्य बदलाव जो इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स को प्रभावित करेंगे:

  1. भत्तों (Allowances) और पर्क्विजिट्स (Perquisites) में बढ़ोतरी
    • HRA (House Rent Allowance): अब बैंगलोर, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद को भी मेट्रो शहरों में शामिल किया गया है, जिससे इन शहरों में रहने वाले सैलरीड लोगों को 50% तक ज्यादा छूट मिल सकती है।
    • बच्चों की शिक्षा भत्ता (CEA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस, ब्याज-मुक्त ऋण आदि की सीमाएं बढ़ाई गई हैं।
    • कंपनी कार (Motor Car Perquisite) की वैल्यूएशन में बदलाव: छोटी कार पर अब ज्यादा टैक्सेबल वैल्यू (जैसे ₹5,000/माह से बढ़कर) लेकिन कुछ मामलों में छूट भी।
    • मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए ऋण पर पर्क्विजिट वैल्यू नहीं लगेगी अगर कुल ₹2 लाख से कम हो।
    • ओवरसीज ट्रीटमेंट की छूट सीमा ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹8 लाख की जा सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन बढ़ी हुई छूटों से ₹15-25 लाख सैलरी वाले लोग पुरानी रीजीम में नए रीजीम से कम टैक्स दे सकते हैं।
  2. PAN कोटिंग के नियमों में राहत
    • कैश डिपॉजिट/विड्रॉल: अब सालाना कुल ₹10 लाख से ज्यादा पर ही PAN जरूरी (पहले दैनिक ₹50,000 पर)।
    • वाहन खरीद: ₹5 लाख से ज्यादा पर PAN अनिवार्य (दो-पहिया वाहन भी शामिल)।
    • प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन: सीमा ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख।
    • बैंक डिपॉजिट, होटल पेमेंट आदि में भी सीमाएं बढ़ीं, जिससे छोटे ट्रांजेक्शन आसान होंगे।
  3. फॉर्म्स में बदलाव
    • पुराने फॉर्म्स जैसे Form 16, Form 26AS, Form 16A नए नंबरों से जारी होंगे (जैसे Form 16 → Form 130, Form 26AS → Form 168)।
    • ITR फाइलिंग और TDS सर्टिफिकेट में नई नंबरिंग से टैक्सपेयर्स को आदत डालनी होगी।
  4. पुरानी vs नई रीजीम: एक्सपर्ट्स की राय कई चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का मानना है कि बढ़ी हुई छूटों (HRA, CEA आदि) से पुरानी रीजीम का आकर्षण बढ़ेगा, खासकर मध्यम वर्ग के लिए। नए रीजीम में कोई छूट नहीं होती, लेकिन स्लैब रेट्स कम हैं। अगर आप डिडक्शन क्लेम करते हैं तो पुरानी रीजीम फायदेमंद हो सकती है। ये बदलाव अभी ड्राफ्ट में हैं, पब्लिक फीडबैक 22 फरवरी 2026 तक मांगा गया है।
DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

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