जयपुर। सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले उन कैंसरों में से एक है जिसे समय रहते पहचान कर पूरी तरह रोका और ठीक किया जा सकता है। इसके बावजूद भारत में हर साल हज़ारों महिलाएं इस बीमारी से प्रभावित होती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है जागरूकता की कमी, नियमित जांच न कराना और देर से इलाज शुरू होना।
सर्वाइकल कैंसर आमतौर पर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) नामक वायरस के लंबे समय तक बने रहने वाले संक्रमण से होता है। यह वायरस बहुत आम है और यौन संपर्क से फैलता है। ज़्यादातर मामलों में शरीर की इम्यूनिटी HPV को खुद ही खत्म कर देती है, लेकिन अगर संक्रमण लंबे समय तक बना रहे, तो यह गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) में ऐसे बदलाव कर सकता है जो आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकते हैं।
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर की एडिशनल डायरेक्टर – ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विशेषज्ञ, डॉ. स्मिता वैद ने बताया, “भारत में दुनिया के कुल सर्वाइकल कैंसर मामलों का लगभग 20 प्रतिशत बोझ है, जबकि नियमित स्क्रीनिंग से इस बीमारी के जोखिम को 70 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। 95 प्रतिशत से अधिक सर्वाइकल कैंसर HPV संक्रमण से जुड़े होते हैं और शुरुआती चरण में इसके कोई लक्षण नहीं होते। यही वजह है कि समय पर जांच कराना बेहद ज़रूरी है। अगर बीमारी जल्दी पकड़ में आ जाए, तो इलाज आसान होता है और 90 प्रतिशत से अधिक महिलाएं पूरी तरह ठीक हो सकती हैं।”
सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख कारण और जोखिम
• लंबे समय तक बना रहने वाला HPV संक्रमण
• कम उम्र में यौन सक्रिय होना या कई यौन साथी होना
• कमजोर इम्यून सिस्टम
• धूम्रपान
• लंबे समय तक हेल्थ चेक-अप या स्क्रीनिंग न कराना
• HPV वैक्सीनेशन न होना
सामान्य लक्षण जिन्हें नज़रअंदाज़ न करें
• पीरियड्स के बीच, संबंध के बाद या मेनोपॉज़ के बाद ब्लीडिंग
• असामान्य या बदबूदार वजाइनल डिस्चार्ज
• सेक्स के दौरान दर्द
• पेल्विक या कमर के निचले हिस्से में लगातार दर्द
डॉक्टरों के अनुसार, शुरुआती सर्वाइकल कैंसर में अक्सर कोई लक्षण नहीं होते, इसलिए कई महिलाएं बीमारी बढ़ने तक खुद को स्वस्थ मानती रहती हैं। ऐसे में नियमित जांच ही सबसे सुरक्षित तरीका है।
जल्दी जांच क्यों है ज़रूरी
• सर्वाइकल कैंसर से पहले प्री-कैंसर बदलावों का पता लगाया जा सकता है
• पैप स्मीयर और HPV टेस्ट शुरुआती बदलावों की पहचान करते हैं
• बिना लक्षण वाली महिलाओं में भी स्क्रीनिंग जान बचा सकती है
सर्वाइकल हेल्थ के लिए क्या करें
• 21 साल की उम्र से या डॉक्टर की सलाह अनुसार नियमित स्क्रीनिंग कराएं
• पैप स्मीयर और HPV टेस्ट समय पर कराएं
• किसी भी असामान्य लक्षण को नज़रअंदाज़ न करें
• डॉक्टर की सलाह से HPV वैक्सीनेशन करवाएं
• धूम्रपान से बचें और इम्यूनिटी मजबूत रखें
• महिलाओं के स्वास्थ्य पर खुलकर बात करें और समय पर डॉक्टर से मिलें
सर्वाइकल हेल्थ अवेयरनेस सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि सही समय पर सही कदम उठाने की अपील है। एक साधारण जांच न सिर्फ बीमारी को रोक सकती है, बल्कि एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य भी सुनिश्चित कर सकती है।






