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February 1, 2026 10:14 am

GDP के लिए खतरा बनी ‘डिजिटल लत’! इकोनॉमिक सर्वे की 8 सिफारिशें बदल देंगी आपके बच्चे की जिंदगी

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डिजिटल डेस्‍क, नई दिल्‍ली। बजट सत्र से ठीक तीन दिन पहले 29 जनवरी 2026 को संसद में पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने पहली बार देश की आर्थिक तस्वीर में शारीरिक और मानसिक सेहत को प्रमुखता से शामिल किया है। इस सर्वे में बच्चों और युवाओं में तेजी से बढ़ रही डिजिटल लत (digital addiction) को न सिर्फ एक सामाजिक समस्या, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, उत्पादकता और मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया गया है।

सर्वे के अनुसार, स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर युवाओं का अत्यधिक समय बिताना अब एक बड़ी चुनौती बन चुका है। यह लत चिंता, अवसाद, नींद की कमी, कम आत्मसम्मान, साइबरबुलिंग और ध्यान केंद्रित करने में कमी जैसी समस्याओं को जन्म दे रही है। इससे पढ़ाई, करियर और कार्यस्थल पर उत्पादकता प्रभावित हो रही है, जो लंबे समय में जीडीपी और देश की आर्थिक वृद्धि पर असर डाल सकता है।

डिजिटल लत कितना बड़ा खतरा है?

  • 15-24 वर्ष के आयु वर्ग में सोशल मीडिया लत की उच्च दर पाई गई है, जिसकी पुष्टि भारतीय और वैश्विक अध्ययनों से होती है।
  • अत्यधिक स्क्रीन टाइम से ‘स्लीप डेट’ (नींद की कमी), distractions और फोकस में कमी आती है, जो अकादमिक प्रदर्शन और कार्यक्षमता को कम करती है।
  • इससे सामाजिक पूंजी (social capital) का क्षरण हो रहा है, साथ ही impulsively ऑनलाइन खर्च, गेमिंग और साइबर फ्रॉड से आर्थिक नुकसान भी।
  • सर्वे इसे public health crisis मानते हुए चेतावनी देता है कि अगर इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो भारत का demographic dividend खतरे में पड़ सकता है।

सर्वे में क्या सिफारिशें की गई हैं?

इकोनॉमिक सर्वे ने डिजिटल लत से निपटने के लिए बहुआयामी उपाय सुझाए हैं:

  • उम्र-आधारित प्रतिबंध: सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर उम्र सीमा तय करना, जैसे कम उम्र के बच्चों के लिए एक्सेस ब्लॉक या age verification अनिवार्य करना।
  • डिजिटल वेलनेस शिक्षा: स्कूलों में साइबर-सेफ्टी, डिजिटल हाइजीन और स्क्रीन टाइम मैनेजमेंट पर पाठ्यक्रम शामिल करना।
  • पैरेंटल और कम्युनिटी इंटरवेंशन: माता-पिता को स्क्रीन टाइम मैनेजमेंट की ट्रेनिंग, परिवार में डिवाइस-फ्री घंटे और ऑफलाइन एक्टिविटी को बढ़ावा।
  • स्कूलों में सुधार: स्क्रीन टाइम लिमिट, अनिवार्य फिजिकल एक्टिविटी, टेक्नोलॉजी-फ्री जोन और पीयर-मेंटर प्रोग्राम।
  • प्लेटफॉर्म जिम्मेदारी: सोशल मीडिया कंपनियों पर हानिकारक कंटेंट के लिए जवाबदेही, ऑटो-प्ले फीचर्स पर रोक और हाई-रिस्क कंटेंट डिफॉल्ट ब्लॉक।
  • सरकारी पहल विस्तार: Tele-MANAS को डिजिटल लत के लिए विस्तारित करना, NIMHANS की SHUT क्लिनिक जैसी सुविधाएं बढ़ाना।
  • अन्य सुझाव: ऑफलाइन यूथ हब्स (खासकर शहरी स्लम और ग्रामीण इलाकों में), डिफरेंशिएटेड डेटा प्लान (एजुकेशनल vs रिक्रिएशनल) और नेशनल डेटा कलेक्शन डिजिटल लत पर।

दुनिया के अन्य देशों ने क्या कदम उठाए हैं?

कई देश पहले से ही डिजिटल लत पर सख्त कदम उठा चुके हैं, जिन्हें सर्वे में संदर्भित किया गया है:

  • चीन: बच्चों के लिए गेमिंग समय सीमित (सप्ताह में 3 घंटे), सोशल मीडिया पर उम्र प्रतिबंध।
  • यूरोपीय संघ: GDPR और DSA के तहत बच्चों के डेटा प्रोटेक्शन और एज-एप्रोप्रिएट डिजाइन अनिवार्य।
  • ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका: कुछ राज्यों में सोशल मीडिया पर 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंध या पैरेंटल कंसेंट जरूरी।
  • भारत में भी पहले से कुछ कदम जैसे PRAGYATAH फ्रेमवर्क (स्कूलों में सुरक्षित इंटरनेट), ऑनलाइन गेमिंग (रेगुलेशन) एक्ट 2025 और CBSE की गाइडलाइंस लागू हैं।
DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

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