पाकिस्तान और अफ़ग़ान तालिबान (Afghan Taliban) के बीच चल रहा संघर्ष हाल के दिनों में काफी तेज़ हो गया है। फरवरी 2026 में पाकिस्तान ने “ओपन वॉर” घोषित कर दिया, काबुल, कंधार और अन्य इलाकों में एयरस्ट्राइक्स कीं, जबकि तालिबान ने बॉर्डर पर जवाबी हमले किए। यह सब मुख्य रूप से Tehreek-e-Taliban Pakistan (TTP) के हमलों से जुड़ा है, जिन्हें पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान में शेल्टर मिलने का आरोप लगाता है।
भारत पर असर क्या हो सकता है?
यह संघर्ष भारत के लिए मिश्रित प्रभाव वाला है:
- संभावित फायदे:
- पाकिस्तान का ध्यान पश्चिमी बॉर्डर (अफ़ग़ानिस्तान) पर ज्यादा केंद्रित हो रहा है, जिससे पूर्वी मोर्चे (भारत के साथ LoC) पर उसकी सैन्य तैनाती और फोकस कम हो सकता है। इससे भारत को कुछ “breathing space” मिल सकता है, खासकर जम्मू-कश्मीर में।
- भारत का तालिबान के साथ बढ़ता संपर्क (मानवीय सहायता, कूटनीतिक मुलाकातें जैसे अमीर खान मुत्तकी की भारत यात्रा) पाकिस्तान को और परेशान कर रहा है। पाकिस्तान बार-बार आरोप लगा रहा है कि तालिबान “भारत का प्रॉक्सी” बन गया है, जो भारत की क्षेत्रीय स्थिति को मजबूत दिखाता है।
-
- संभावित नुकसान/जोखिम:
- अगर संघर्ष लंबा चला या फैला, तो क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी — जैसे शरणार्थी संकट, हथियारों का फैलाव, या TTP/ISIS-K जैसे ग्रुप्स की गतिविधियां भारत तक पहुंच सकती हैं।
- पाकिस्तान पहले से ही भारत को दोष दे रहा है (TTP को सपोर्ट देने का आरोप), जो प्रोपेगैंडा या एस्केलेशन का बहाना बन सकता है।
- भारत ने पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक्स की निंदा की है (नागरिक मौतों पर), लेकिन पूर्ण युद्ध की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा प्रभावित होगी।
कुल मिलाकर, अल्पकाल में भारत को रणनीतिक फायदा मिल सकता है क्योंकि पाकिस्तान दो मोर्चों पर उलझा है, लेकिन लंबे समय में अस्थिरता भारत के लिए भी चुनौती बनेगी। भारत स्थिति पर नजर रख रहा है और फिलहाल सीधे हस्तक्षेप से दूर है।
- संभावित नुकसान/जोखिम:






