इंदौर दूषित पानी संकट: सीएम मोहन यादव के निर्देश पर बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई, कमिश्नर हटाए गए
इंदौर, 3 जनवरी 2026: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की आपूर्ति से उपजे स्वास्थ्य संकट ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है। सीवेज लाइन की लीकेज से पेयजल में गंदा पानी मिलने के कारण अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2000 से अधिक लोग उल्टी-दस्त से पीड़ित होकर अस्पतालों में भर्ती हैं। देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में प्रसिद्ध इंदौर में यह त्रासदी प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बन गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तत्काल सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उच्चस्तरीय बैठक के बाद इंदौर नगर निगम के कमिश्नर दिलीप यादव को हटाया गया है, जबकि अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को तत्काल इंदौर से बाहर ट्रांसफर कर दिया गया। इसके अलावा पीएचई विभाग के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है। पहले चरण में PHE के प्रभारी उप-अभियंता शुभम श्रीवास्तव को सेवा से बर्खास्त किया गया था, साथ ही नगर निगम के जोनल अधिकारी शालिग्राम सिटोले और सहायक अभियंता योगेश जोशी को भी सस्पेंड कर दिया गया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा, “भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई घटना में राज्य सरकार किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जा रही है।” उन्होंने मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में मामले की समीक्षा की और खाली पदों को तुरंत भरने के भी निर्देश दिए।
प्रशासन के मुताबिक, पुलिस चौकी के पास बने शौचालय के नीचे पेयजल पाइपलाइन में लीकेज होने से सीवेज का पानी मिल गया था। लीकेज की मरम्मत कर दी गई है और प्रभावित इलाके में टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है। घर-घर सर्वे कर मरीजों को दवाएं बांटी जा रही हैं। जिला कलेक्टर ने बताया कि पानी के सैंपल में बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है।
इस घटना पर राजनीतिक बवाल भी मचा है। भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाते हुए इसे “अक्षम्य पाप” बताया और कहा कि सबसे स्वच्छ शहर में ऐसा हादसा शर्मनाक है। वहीं विपक्ष ने इसे प्रशासन की घोर लापरवाही करार दिया है। हाईकोर्ट और एनएचआरसी ने भी मामले का संज्ञान लिया है और रिपोर्ट तलब की है।
सरकार ने मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये की सहायता राशि की घोषणा की है, लेकिन पीड़ित परिवारों का कहना है कि जान की कीमत इससे कहीं ज्यादा है। प्रशासन युद्धस्तर पर राहत कार्यों में जुटा है, ताकि स्थिति जल्द सामान्य हो सके।






