
एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ वॉर कई देशों में हड़कंप मचा रहा है तो दूसरी तरफ चीन और अमेरिका के बीच दक्षिण चीन सागर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ पर लगातार भारत को धमकियां दे रहे हैं. ट्रंप की कोशिश भारत को झुकाने पर है, लेकिन मोदी सरकार सीना तानकर अमेरिका के सामने खड़ी है. सरकार का कहना है कि उसके लिए राष्ट्रहित पहले है. वो जो भी फैसला लेगी देश के हित को ध्यान में रखते हुए लेगी. ट्रंप को बयानों से तो मैसेज दिया ही जा रहा है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसा कुछ किया जा रहा है जिससे उन्हें सीधा संदेश जाए. काम कर रहा है जो कहीं से भी अमेरिका बिल्कुल नहीं चाहता है. अगर कहें कि भारत ट्रंप को चिढ़ा रहा है तो गलत नहीं होगा. दरअसल, हिंदुस्तान रूस के साथ अपनी दोस्ती को और मजबूत कर रहा है तो वहीं चीन के साथ संबंधों को बेहतर कर रहा है. ट्रंप यही नहीं चाहते. रूस और भारत की मजबूत होती दोस्ती ट्रंप भारत को रूस से दूर करना चाहते हैं. वो जितना ये

व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के अलास्का में मुलाकात की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है. रूसी राष्ट्रपति को सुरक्षित ले जाने और लाने के

दक्षिण चीन सागर के स्कारबोरो शोल के पास चीन और अमेरिकी सैनिकों के बीच भिड़ंत की खबर है. चीन का कहना है कि इस सबसे

टैरिफ वॉर के बीच तेजस के इंजन की सप्लाई अमेरिका की तरफ से रोक दी जाएगी? ये एक बड़ा सवाल है जो हालिया अमेरिका और

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिका के भारत एवं पाकिस्तान दोनों के साथ संबंध ‘‘अच्छे’’ हैं और राजनयिक ‘‘दोनों देशों को लेकर प्रतिबद्ध’’

अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद से ही वहां रहने वाले दूसरे देशों के लोगों को कई मुसीबतों का सामना

बस अब से 2 दिन बाद यानी 15 अगस्त को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अलास्का में मुलाकात

जून में हुए इजराइल-ईरान के बीच 12 दिनों के संघर्ष में इजराइल ने ईरान को घर में घुसकर नुकसान पहुंचाया है. इजराइल ने ईरान के

रूस के लोगों को अब तुर्की में रहना रास नहीं आ रहा है. इसका अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि पिछले दो साल में
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