
हे मनुष्य के पुत्र ! मेरी राह में यदि तुझ पर विपत्तियाँ न टूट पड़ें तो तू उन लोगों के मार्ग का अनुसरण भला कैसे

हे चेतना के पुत्र ! पक्षी अपने नीड़ की कामना करता है और बुलबुल गुलाब के सौंदर्य की, जबकि मानवात्मा रूपी पखेरू क्षणभंगुर धूल से

हाल की घटनाओं से स्पष्ट है कि ईरान के अधिकारी एक बहाई कैदी को दूसरे के खिलाफ सबूत गढ़ने के लिए यातना दे रहे हैं।

जयपुर, 2 अप्रैल 2026 – राजस्थान राज्य बहाई परिषद द्वारा आयोजित तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक का आज सफल समापन हो गया। 30 मार्च से 1

हे चेतना के पुत्र ! पक्षी अपने नीड़ की कामना करता है और बुलबुल गुलाब के सौंदर्य की, जबकि मानवात्मा रूपी पखेरू क्षणभंगुर धूल से

हे मनुष्य की संतानो ! क्या तुम यह नहीं जानते कि हमने तुम सबको एक ही मिट्टी से क्यों पैदा किया ? इसलिये कि कोई

जेनेवा—24 मार्च 2026—दो मॉक फांसी, दीर्घकालिक यातना और पूछताछ के दौर से गुजरने के बाद, ईरान के करमान में जेल में बंद पेवंद नईमी नामक

राजस्थान की राजधानी जयपुर में बहाई समुदाय द्वारा बहाई नववर्ष ‘नौरूज़’ का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण के साथ मनाया गया। यह

ओ चेतना के पुत्र ! मैंने तुझे ऐश्वर्यवान उत्पन्न किया, फिर तू स्वयं को दरिद्रता के तल पर क्यों ला रहा है? मैंने तुझे श्रेष्ठ

हे चेतना के पुत्र ! मेरी दृष्टि में सर्वाधिक प्रिय वस्तु है न्याय ! तुझे यदि मेरी अभिलाषा है तो उससे विमुख न हो और
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