मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और जंग जैसे हालात का असर अब भारत के बाजारों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। देश की सबसे बड़ी फल मंडियों में शामिल मुंबई के फ्रूट मार्केट में इन दिनों भारी मंदी का माहौल है। हालात ऐसे हो गए हैं कि कई फलों के दाम गिरकर आधे से भी कम रह गए हैं और व्यापारियों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि विदेशों से आने वाले फलों की सप्लाई प्रभावित होने के साथ-साथ लोकल बाजार में भी खरीददार कम हो गए हैं। मिडिल ईस्ट के कई देशों के साथ व्यापार प्रभावित होने से निर्यात पर असर पड़ा है, जिसका सीधा असर मुंबई की फल मंडी पर देखने को मिल रहा है। आमतौर पर जो फल अच्छे दामों में बिकते थे, वे अब कौड़ियों के भाव बेचने पड़ रहे हैं।
मंडी के एक व्यापारी ने बताया कि हालात इतने खराब हो गए हैं कि लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है, लेकिन बिक्री के दाम गिर गए हैं। ऐसे में व्यापारियों की कमाई बंद हो गई है और कई लोगों को घाटे में माल बेचना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट का क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है। यहां तनाव बढ़ने से जहाजों की आवाजाही, आयात-निर्यात और सप्लाई चेन प्रभावित होती है, जिसका असर सीधे भारत जैसे बड़े बाजारों पर पड़ता है। खासतौर पर फल और सब्जियों का कारोबार तेजी से प्रभावित होता है क्योंकि यह जल्दी खराब होने वाला सामान होता है।
मुंबई फ्रूट मार्केट में इस समय सेब, केला, संतरा और अंगूर जैसे फलों के दाम में भारी गिरावट देखी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि अगर यही स्थिति कुछ दिन और रही तो उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। कई छोटे व्यापारी तो पहले ही कर्ज में डूबने की बात कह रहे हैं।
व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि ट्रांसपोर्ट खर्च कम करने और बाजार को स्थिर करने के लिए जल्द कदम उठाए जाएं, ताकि उन्हें राहत मिल सके।
फिलहाल मंडी में मायूसी का माहौल है और हर किसी की नजर अंतरराष्ट्रीय हालात पर टिकी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट का तनाव कम नहीं होगा, तब तक कारोबार संभलना मुश्किल है।






