जयपुर के स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट ने कैंसर के इलाज में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यहां के चिकित्सकों ने 35 वर्षीय एक महिला मरीज में दूसरी बार हेप्लो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट (Haplo-identical Bone Marrow Transplant) सफलतापूर्वक किया है, जो देश में बेहद दुर्लभ मामला माना जा रहा है।
महिला मरीज एक्यूट मायलोइड ल्यूकेमिया (Acute Myeloid Leukemia – AML) से पीड़ित थीं। इस बीमारी में बोन मैरो असामान्य रूप से असामान्य मायलोइड कोशिकाओं का उत्पादन करने लगती है, जिससे स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं, सफेद रक्त कोशिकाएं और प्लेटलेट्स का निर्माण बाधित हो जाता है। कैंसर के दोबारा उभरने (रिलैप्स) के बाद चिकित्सकों ने उच्च जोखिम के बावजूद दूसरा ट्रांसप्लांट करने का निर्णय लिया, जो पूरी तरह सफल रहा।
चिकित्सकों के अनुसार, देश में ऐसा मामला जहां एक ही कैंसर पीड़ित महिला में दूसरी बार हेप्लो-आइडेंटिकल ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया हो, बहुत कम देखने को मिलता है। यह सफलता न केवल मरीज के लिए नई जिंदगी की उम्मीद है, बल्कि राजस्थान और पूरे देश के ब्लड कैंसर के मरीजों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है।
स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, जो एसएमएस अस्पताल से संबद्ध है, हाल ही में बोन मैरो ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है और जल्द ही देश की सबसे बड़ी 50 बेड वाली BMT यूनिट शुरू होने वाली है, जिससे हजारों मरीजों को समय पर और मुफ्त इलाज मिल सकेगा।






