वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति को सुप्रीम कोर्ट से करारा झटका लगा है। 20 फरवरी 2026 को 6-3 के बहुमत से कोर्ट ने फैसला दिया कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर रिसिप्रोकल (परस्पर) या देश-विशेष टैरिफ नहीं लगा सकते। यह फैसला ट्रंप की “न सुनने की आदत” और “हर किसी को धमकाने” वाली रणनीति को पटरी से उतार देता है।
फैसले की मुख्य बातें:
- कोर्ट ने कहा कि संविधान के आर्टिकल-1, सेक्शन-8 के तहत टैक्स और ड्यूटी (टैरिफ) लगाने का अधिकार सिर्फ कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं।
- IEEPA (1977 का कानून) राष्ट्रपति को विदेशी खतरे के समय “इम्पोर्टेशन को रेगुलेट” करने की शक्ति देता है, लेकिन इसमें टैरिफ लगाने का जिक्र नहीं है। कोई पूर्व राष्ट्रपति ने कभी IEEPA से टैरिफ नहीं लगाए।
- ट्रंप ने पद संभालने के बाद दो मुख्य टैरिफ लगाए थे:
- ड्रग ट्रैफिकिंग टैरिफ: कनाडा, मैक्सिको पर 25%, चीन पर 10% (फेंटानिल और ड्रग्स के बहाने)।
- रिसिप्रोकल टैरिफ: अप्रैल 2025 के लिबरेशन डे पर रोज गार्डन में घोषित – लगभग सभी देशों पर 10% बेसलाइन टैरिफ, कुछ पर 50% तक (ट्रेड डेफिसिट के नाम पर)।
- इन टैरिफ से अमेरिका ने $130-175 बिलियन से ज्यादा राजस्व जुटाया, लेकिन अब इम्पोर्टर्स रिफंड की मांग कर सकते हैं।
ट्रंप की रणनीति पर असर:
- ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जे की योजना का समर्थन न करने वाले यूरोपीय देशों (EU, UK, जर्मनी आदि) को टैरिफ की धमकी दी थी, जिससे ग्लोबल ट्रेड व्यवस्था उलट-पुलट हो गई थी।
- फैसले ने इन अतिरिक्त टैरिफ को अमान्य कर दिया, लेकिन बेसलाइन टैरिफ (लिबरेशन डे के बाद की सौदेबाजी से बने) औसतन 15% पर टिके रह सकते हैं, क्योंकि वे अलग कानूनों से लगे थे।
- ट्रंप ने फैसले को “terrible” बताते हुए तुरंत नया 10-15% ग्लोबल टैरिफ (1974 ट्रेड एक्ट के सेक्शन-122 के तहत) लगाने की घोषणा की, लेकिन यह अस्थायी है और कांग्रेस की मंजूरी पर निर्भर।
वैश्विक प्रभाव:
- विकासशील देशों और व्यापार साझेदारों (चीन, EU, जापान, भारत आदि) को राहत मिली है, लेकिन अनिश्चितता बनी हुई है।
- अमेरिकी बिजनेस और स्टेट्स (जिन्होंने मुकदमा दायर किया) ने फैसले का स्वागत किया। रिफंड से अर्थव्यवस्था को फायदा हो सकता है।
- ट्रंप प्रशासन का कहना है कि “टैरिफ नीति नहीं बदलेगी”, लेकिन अब कांग्रेस से मंजूरी लेनी पड़ेगी।
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