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January 15, 2026 10:51 pm

तेहरान में खून-खराबा बढ़ा… बवाल के बीच ट्रंप बोले- ईरान को आज़ाद कराने को तैयार अमेरिका

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11 जनवरी 2026: ईरान में पिछले साल के अंत से शुरू हुए आर्थिक संकट के विरोध अब पूर्ण राजनीतिक क्रांति में बदल चुके हैं। लोग सीधे सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की वैधता को चुनौती दे रहे हैं। प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए थे, जब रियाल की कीमत में भारी गिरावट और महंगाई ने बाजारों को हिलाकर रख दिया था। अब यह 2022 की महसा अमीनी आंदोलन के बाद सबसे बड़ा विद्रोह बन चुका है।

ताजा स्थिति (11 जनवरी तक):

  • मौतें: मानवाधिकार संगठनों (जैसे Iran Human Rights NGO, HRANA) के अनुसार कम से कम 72-78 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं। कुछ रिपोर्ट्स में 51+ मौतें और सैकड़ों घायल बताए गए हैं। असल संख्या ज्यादा हो सकती है क्योंकि इंटरनेट और मोबाइल ब्लैकआउट (8 जनवरी से) जानकारी छिपा रहा है।
  • फैलाव: 100+ से ज्यादा शहरों (कुछ रिपोर्ट्स में 180+), सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं। तेहरान, मशहद (खामेनेई का गृहनगर), इस्फहान, किर्मानशाह, शिराज, तबरीज आदि में बड़े प्रदर्शन।
  • नारे: “Death to Khamenei!” (मार्ग बार खामेनेई), “Death to the Dictator!”, “This year is the year of blood, Khamenei will be overthrown!”, “Long live the Shah!”, “Pahlavi will return!” (निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के समर्थन में)।
  • कार्रवाई: प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतें, मस्जिदें, IRIB बिल्डिंग जलाईं, फ्लैग जलाए, सड़कें ब्लॉक कीं। सुरक्षा बलों ने लाइव फायरिंग, आंसू गैस, अस्पतालों में छापेमारी की।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया:

  • डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी: अगर सरकार प्रदर्शनकारियों पर हिंसा करती है, तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा। उन्होंने कहा, “Iran is in big trouble… we’ll come to their rescue.”
  • खामेनेई ने ट्रंप को दोषी ठहराया, प्रदर्शनकारियों को “vandals”, “saboteurs” और अमेरिका के “mercenaries” कहा। उन्होंने कहा, “हम पीछे नहीं हटेंगे!”
  • ईरान की सेना ने “राष्ट्रीय हितों” की रक्षा की कसम खाई।

क्यों इतना गुस्सा?

  • आर्थिक संकट: रियाल 80% गिरा, महंगाई 40%+, बिजली-पानी कटौती, बेरोजगारी।
  • राजनीतिक: खामेनेई के शासन पर सीधी चुनौती, महिलाओं की आजादी, युवाओं की बेरोजगारी, क्षेत्रीय युद्धों (गाजा, लेबनान) पर खर्च।
  • प्रदर्शन अब रेजीम चेंज की मांग कर रहे हैं, न कि सिर्फ आर्थिक सुधार।

जागरूक रहें! इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद वीडियो सोशल मीडिया पर लीक हो रहे हैं – लोग पॉट बजाकर, सड़कें जला कर विरोध जता रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय (UN, Amnesty, HRW) ने हिंसा की निंदा की है।

DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

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