उत्तर प्रदेश से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां अवैध अंग तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पहले किडनी की खरीद-फरोख्त की खबरें सामने आती रही हैं, लेकिन अब लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंग के सौदे का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क को चलाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Telegram का इस्तेमाल किया जा रहा था। अधिकारियों को दो ऐसे टेलीग्राम ग्रुप मिले हैं, जिनमें करीब 700 सदस्य जुड़े हुए थे। इन ग्रुप्स के जरिए कथित तौर पर जरूरतमंद मरीजों और अंग बेचने के इच्छुक लोगों के बीच संपर्क कराया जाता था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इन ग्रुप्स में अंगों की कीमत, डोनर और रिसीवर की जानकारी और डील से जुड़ी बातचीत खुलेआम की जाती थी। यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें बिचौलिए अहम भूमिका निभा रहे थे। ये बिचौलिए गरीब और मजबूर लोगों को पैसों का लालच देकर अंग बेचने के लिए तैयार करते थे।
सूत्रों के अनुसार, इस रैकेट में शामिल लोग न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और ग्रुप से जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी है। कई संदिग्धों पर नजर रखी जा रही है और जल्द ही बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की अवैध गतिविधियां न केवल कानून के खिलाफ हैं, बल्कि मानव जीवन के लिए भी बेहद खतरनाक हैं। बिना उचित मेडिकल प्रक्रिया और निगरानी के अंगों का ट्रांसप्लांट करना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे इस तरह के किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें। साथ ही लोगों को जागरूक रहने और किसी भी लालच में आकर ऐसे गैरकानूनी कामों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
फिलहाल, इस पूरे मामले ने राज्य में सनसनी फैला दी है और यह एक बार फिर दिखाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल किस हद तक किया जा सकता है। जांच पूरी होने के बाद ही इस नेटवर्क की असली तस्वीर सामने आ पाएगी।







