इंदौर, 31 दिसंबर 2025: इंदौर के एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट के इंजीनियरिंग छात्रों ने शैक्षणिक भ्रमण के दौरान सनावदिया गांव स्थित जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट का दौरा किया। यहां सेंटर की निदेशिका और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने छात्रों का स्वागत किया और उन्हें प्रकृति के साथ सामंजस्य में जीने की प्रेरणा दी।
डॉ. मगिलिगन ने छात्रों को अपने जैव विविधता फार्म का भ्रमण कराया, जहां फूल, फल, सब्जियां और विभिन्न वनस्पतियां उगाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके दिवंगत पति जिम्मी मगिलिगन ने इस विशेष घर ‘गिरिदर्शन’ को प्रकृति के पांच तत्वों – मिट्टी, पानी, अग्नि, हवा और आकाश – का ध्यान रखकर डिजाइन किया था। बड़ी खिड़कियों और चारों तरफ पेड़ों के कारण घर में दिन भर बिजली की जरूरत नहीं पड़ती, तापमान संतुलित रहता है और हवा का प्रवाह भी प्राकृतिक रूप से होता है।
इसके बाद डॉ. मगिलिगन ने प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित उन्नत प्रौद्योगिकियों का लाइव प्रदर्शन किया। छात्रों ने पहली बार दुनिया भर के विभिन्न प्रकार के 10 सोलर कुकर देखे और सोलर कुकिंग, बेकिंग तथा डीप फ्राइंग की जानकारी प्राप्त की। वे आश्चर्यचकित रह गए जब उन्हें पता चला कि सेंटर केवल 2 किलोवाट सोलर और पवन ऊर्जा से पूरी तरह आत्मनिर्भर है और पिछले 15 वर्षों से पड़ोस के 50 आदिवासी परिवारों को 19 स्ट्रीट लाइट्स निशुल्क प्रदान कर रहा है।
छात्रों ने डॉ. मगिलिगन के व्यापक रिसर्च और सस्टेनेबल लाइफस्टाइल के वास्तविक अनुप्रयोगों से गहरी प्रेरणा ली। इस दौरे ने उन्हें पर्यावरणीय सिद्धांतों को घरों, संस्थानों, उद्योगों और समुदायों में लागू करने का दुर्लभ अवसर प्रदान किया। डॉ. मगिलिगन ने दशकों की चुनौतियों और ग्रह के प्रति समर्पण की अपनी कहानी साझा की, जिसने छात्रों में जिम्मेदारी और इनोवेशन की भावना जगाई।
छात्रों की प्रतिक्रियाएं:
1. एक छात्र ने कहा, “पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन का जीवन सेवा पर आधारित है। वे कम जरूरतों, ईमानदार काम और शरीर, मन व आत्मा को एक दिशा में रखने में विश्वास करती हैं। उनकी निस्वार्थ सेवा हमें प्रेरित करती है कि सच्ची सफलता समाज की करुणा और समर्पण में है।”
2. दूसरे छात्र ने 공유 किया, “डॉ. मगिलिगन से मिलना बेहद प्रेरणादायक था। उनका प्रकृति से गहरा जुड़ाव और जीरो-वेस्ट लाइफस्टाइल अद्भुत है। उनके शब्द ‘सभी प्राणियों के साथ सद्भावना से रहने से दुनिया का भला होगा’ और ‘शरीर, मन व आत्मा एक साथ रहेंगे तभी जीवन सस्टेनेबल होगा’ ने गहरा असर डाला। जिम्मी मगिलिगन सेंटर सस्टेनेबल डेवलपमेंट का जीवंत मॉडल है।”
एक्रोपोलिस प्रतिनिधिमंडल ने डॉ. मगिलिगन की विरासत को आगे बढ़ाने और सस्टेनेबल प्रथाओं को लागू करने की प्रतिबद्धता जताई। डॉ. मगिलिगन देश भर के छात्रों व शोधकर्ताओं को सस्टेनेबिलिटी के लिए प्रेरित करती रहती हैं, साबित करते हुए कि यह कोई वैकल्पिक जीवनशैली नहीं, बल्कि एक सचेत विकल्प है जो स्वस्थ ग्रह और जिम्मेदार समाज का निर्माण करता है।






