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March 6, 2026 2:29 pm

100 साल के शख्स ने चंबल के डकैतों को दी ऐसी मात कि आज भी याद किया जाता है! पूर्व DGP HM जोशी की प्रेरक कहानी

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100 साल के शख्स ने चंबल के डकैतों को दी ऐसी मात कि आज भी याद किया जाता है! पूर्व DGP हरिवल्लभ मोहनलाल जोशी (एच.एम. जोशी) की प्रेरक कहानी

मध्य प्रदेश पुलिस के इतिहास में एक जीवित किंवदंती हैं हरिवल्लभ मोहनलाल जोशी, जिन्हें एच.एम. जोशी के नाम से जाना जाता है। 1948 बैच के पहले IPS अधिकारियों में से एक और अब देश के पहले बैच के आखिरी जीवित सदस्य, जोशी साहब ने हाल ही में अपना 100वां जन्मदिन (5 मार्च 2026) मनाया। उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा अध्याय चंबल के बीहड़ों में डकैतों के खिलाफ बहादुरी और रणनीतिक कार्रवाई है, जिसने पूरे इलाके को आतंक से मुक्ति दिलाई।

चंबल के बीहड़ों में डकैतों का आतंक

1950-70 के दशक में चंबल घाटी (मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सीमाओं पर) डकैतों का गढ़ बनी हुई थी। कुख्यात डकैत जैसे मन सिंह, चोटा नाथू, जगमोहन गैंग और सैकड़ों अन्य गुंडे लूट, हत्या, अपहरण और फिरौती के लिए मशहूर थे। बीहड़ों की जटिल भौगोलिक स्थिति ने पुलिस के लिए चुनौती बढ़ा दी थी। डकैतों का खौफ इतना था कि आम लोग रात को घर से बाहर निकलने से डरते थे।

जोशी साहब की बहादुरीपूर्ण कार्रवाई

एच.एम. जोशी ने चंबल में डकैत विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया। उन्होंने न सिर्फ एनकाउंटर किए, बल्कि डकैतों को आत्मसमर्पण के लिए भी प्रेरित किया। खास तौर पर:

  • जेपी आंदोलन (1970 के दशक) के दौरान उनकी अहम भूमिका रही। उन्होंने 400 से ज्यादा डकैतों के सामूहिक आत्मसमर्पण कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह चंबल इतिहास की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक था।
  • उन्होंने व्यक्तिगत रूप से चोटा नाथू जैसे खूंखार डकैत के खिलाफ ऑपरेशन लीड किया। एक मुठभेड़ में जब चोटा नाथू ने SLR उठाई, तो जोशी साहब के अधीनस्थ कांस्टेबल आत्माराम ने LMG से फायर किया और डकैत को मार गिराया। इस बहादुरी के लिए उन्हें President’s Police and Fire Services Medal for Gallantry से सम्मानित किया गया।
  • उनके सख्त रुख और रणनीति से डकैतों में इतना खौफ था कि उनका नाम सुनते ही कई गुंडे सरेंडर कर देते थे।

प्रेरणा का स्रोत: कर्तव्य और नैतिकता

जोशी साहब की सफलता का राज सिर्फ बंदूक नहीं था, बल्कि उनकी नैतिकता, धैर्य और गीता के सिद्धांतों पर आधारित जीवनदर्शन था। उन्होंने डकैतों को समझाने की कोशिश की कि अपराध का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में आना ही सही है। उनके प्रयासों से चंबल में शांति स्थापित हुई और आज भी पुलिस महकमा उन्हें “सुपरकॉप” मानती है।

आज की स्थिति

100 साल की उम्र में भी जोशी साहब पुलिस परिवार के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। हाल ही में उनके 100वें जन्मदिन पर मध्य प्रदेश पुलिस एसोसिएशन ने भावुक समारोह आयोजित किया। उनकी कहानी बताती है कि सच्ची बहादुरी उम्र से नहीं, बल्कि संकल्प से आती है।

पूर्व DGP एच.एम. जोशी की यह कहानी हर पुलिसकर्मी और नागरिक के लिए प्रेरणा है – कि कर्तव्य पालन से बड़े-बड़े आतंक को मात दी जा सकती है!

DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

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