United Nations General Assembly: अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा संबोधन सत्र में कहा, रूस का मकसद यूक्रेन का वजूद खत्म करना

बाइडेन ने कहा, अमेरिका ने हमेशा यही कोशिश की है कि इन हथियारों के इस्तेमाल की नौबत ही न आए। 

 
United Nations General Assembly: अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा संबोधन सत्र में कहा, रूस का मकसद यूक्रेन का वजूद खत्म करना

नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 77वें सत्र को संबोधित किया। सम्बोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, मैं साफ बात करना चाहता हूं। UN सिक्योरिटी काउंसिल के एक परमानेंट मेंबर ने पड़ोसी देश पर हमला किया है। इसका मकसद एक देश के तौर पर यूक्रेन का वजूद खत्म करना है। बाइडेन ने कहा, अमेरिका ने हमेशा यही कोशिश की है कि इन हथियारों के इस्तेमाल की नौबत ही न आए। यूएन को हमें ऐसा बनाना होगा कि रूस को हमले का जिम्मेदार ठहराया जा सके। यूक्रेन पर हमले के खिलाफ हम रूस के साथ खड़े हैं। इस जंग के लिए मैं एक देश से ज्यादा एक शख्स को जिम्मेदार मानता हूं। सर्दियां आएंगी तो हालात और खराब हो जाएंगे। 

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अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन पर आरोप लगाया कि वो समुद्र में स्वतंत्र आवाजाही यानी ‘फ्रीडम ऑफ नेवीगेशन’ को रोकने की साजिश रच रहा है। उन्हें हिंद और प्रशांत महासागर का जिक्र किया। चीन इस क्षेत्र को ताकत के बल पर हथियाना चाहता है। इशारों में कहा कि अमेरिका इन इरादों को कामयाब नहीं होने देगा। उन्होंने क्लाइमेट चेंज की चुनौती पर कहा, हमने इस बारे में सख्त कानून बनाया है। इस पर अमेरिकी सरकार भारी इन्वेस्टमेंट कर रही है। ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से अमेरिका को भी काफी नुकसान हुआ है। फिर सायबर वॉर पर बाइडेन ने कहा, जून 2021 में पुतिन से मेरी मुलाकात हुई थी। तब अमेरिका पर रूस के सायबर हमलों का मैंने जिक्र किया था। हम टकराव या जंग नहीं चाहते और न ही कोल्ड वॉर जैसी किसी चीज में रुचि है।

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संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UNGA में इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं जा रहे हैं। विदेश मंत्री जयशंकर जनरल असेंबली में शिरकत करेंगे। इस बार संयुक्त राष्ट्र की मीटिंग का एजेंडा रूस पर पाबंदियों में सख्ती लाना ही है। ऐसे में मीटिंग से दूर रहकर भारत ने साफ कर दिया है कि वह रूस पर पश्चिम का एजेंडा थोपे जाने के सामने नहीं झुकेगा। भारत और चीन ही ऐसे देश हैं, जो अमेरिका और यूरोप के आर्थिक प्रतिबंधों के बीच रूस से व्यापार जारी रखे हुए हैं। इससे रूसी अर्थव्यवस्था को काफी सहारा मिला है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी इस मीटिंग में नहीं आएंगे।

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