इराक में श्रीलंका जैसी अराजकता, शिया धर्मगुरु के राजनीति छोड़ने के बाद हिंसा में 20 लोगों की मौत, राष्ट्रपति भवन में घुसे प्रदर्शनकारी

सोमवार को जैसे ही मुक्तदा अल-सदर ने राजनीति छोड़ने का एलान किया, उनके समर्थकों में गुस्सा फूट पड़ा।

 
इराक में श्रीलंका जैसी अराजकता, शिया धर्मगुरु के राजनीति छोड़ने के बाद हिंसा में 20 लोगों की मौत, राष्ट्रपति भवन में घुसे प्रदर्शनकारी

बगदाद। श्रीलंका के बाद अब इराक में अराजकता के हालात बन गए हैं। पिछले दिनों पूरी दुनिया ने देखा कि आर्थिक और राजनीतिक रूप से चरमराए श्रीलंका का हाल क्या हुआ। कुछ ऐसा ही नजारा इराक से भी सामने आया है। जब शिया धर्मगुरु मुक्तदा अल-सद्र ने सोमवार को राजनीति छोड़ने का ऐलान कर दिया। अल-सद्र के समर्थक सड़क पर उतर आए। इतना ही नहीं उनके समर्थकों ने राष्ट्रपति भवन की ओर कूच कर दिया और वे स्वीमिंग पूल और मीटिंग हाल में भी घुस गए। 

सोमवार को जैसे ही मुक्तदा अल-सदर ने राजनीति छोड़ने का एलान किया, उनके समर्थकों में गुस्सा फूट पड़ा। इसके बाद इनकी ईरान समर्थकों से भिड़ंत हो गई। बगदाद की सड़कों पर पथराव शुरू हो गया। इसके बाद कई जगहों पर गोलियां चलने की आवाज सुनाई दी। झड़प में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। इस झड़प में 300 से ज्यादा लोग घायल भी हुए हैं। इराक में कर्फ्यू लगा दिया गया है। 

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पहले से ही राजनीतिक संकट का सामना कर रहे इराक में तमाम तरह की आशंकाओं ने जन्म ले लिया है। इराक की सरकार में गतिरोध तब से आया है जब धर्मगुरु मुक्तदा अल-सद्र की पार्टी ने अक्टूबर के संसदीय चुनावों में सबसे अधिक सीटें जीती थीं लेकिन वह बहुमत तक नहीं पहुंच पाए थे। उन्होंने आम सहमति वाली सरकार बनाने के लिए ईरान समर्थित शिया प्रतिद्वंद्वियों के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया था।

एक सप्ताह से चल रहा था प्रदर्शन
शिया धर्मगुरु के समर्थक बगदाद के ग्रीन जोन में स्थित संसद के बाहर एक सप्ताह से धरना दे रहे थे। जैसे ही उन्हें मुक्तदा अल सदर के राजनीतिक संन्यास के फैसले का पता चला, वे भड़क गए। इसके बाद सेना व पुलिस ने मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों से ग्रीन जोन छोड़ने की अपील की। 

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राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है इराक
धर्मगुरु अल-सदर ने एक ट्वीट में राजनीति से हटने की घोषणा की और अपने पार्टी कार्यालयों को बंद करने का आदेश दिया। धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थान खुले रहेंगे। इसके बाद उनके सैकड़ों समर्थक सरकारी महल पहुंच गए। बता दें कि इराक पहले से ही राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है। पिछले 10 महीने से यहां कोई सरकार नहीं है और न ही कोई प्रधानमंत्री। यही कारण है कि इराक में राजनीतिक अराजकता का माहौल बना हुआ है और अब शिया धर्मगुरु मुक्तदा अल-सद्र के संन्यास के बाद स्थिति और खराब हो सकती है, ऐसा कहा जा रहा है।

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