मंदी से प्लान चौपट: दिल्ली के फ्लैट के रेट में स्पेन में मिल रहा पूरा गांव, इस वेबसाइट पर है ऑन सेल

 
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Salto de Castro: गांव में कुल 44 घर, एक होटल, एक चर्च, एक स्कूल, एक म्युनिसिपल स्विमिंग पूल और सिविल गार्ड के रहने वाली एक बैरक इमारत है।

 

नई दिल्ली। Spanish Village On Sale For Rs 2 Crore: उत्तर-पश्चिमी स्पेन (Spain) के जमोरा (Zamora) प्रांत में पुर्तगाल (Portugal) की सीमा से लगा सल्तो डी केस्त्रो (Salto de Castro) नाम का पूरा गांव बिक रहा है। इसकी कीमत दो लाख साठ हजार यूरो लगाई गई है। भारतीय करेंसी के हिसाब से इतनी रकम आज के लगभग सवा दो करोड़ रुपये के बराबर होती है। उल्लेखनीय है कि राजधानी दिल्ली में कई सोसायटी में इस कीमत में फ्लैट मिलता है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेन की राजधानी मेड्रिड (Madrid) से सड़क मार्ग के जरिये इस गांव तक तीन घंटे में पहुंचा जा सकता है। 

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बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सल्तो डी केस्त्रो में कई ऐसी इमारतें हैं जो स्पेन के किसी छोटे कस्बे में होती हैं। गांव में कुल 44 घर, एक होटल, एक चर्च, एक स्कूल, एक म्युनिसिपल स्विमिंग पूल और सिविल गार्ड के रहने वाली एक बैरक इमारत है। अब इस गांव में कोई नहीं रहता है। रिपोर्ट के मुताबिक, तीन दशक से ज्यादा समय पहले यह गांव वीरान हो गया था। सन 2000 की शुरुआत में एक शख्स ने इस गांव को खरीदा था। उसने गांव को पर्यटक स्थल बनाने के इरादे से खरीदा था लेकिन यूरोजोन संकट ने योजना पर पानी फेर दिया।

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इस वेबसाइट पर हो रही गांव की बिक्री
रॉयल इन्वेस्ट कंपनी के एक कर्मचारी रॉनी रोड्रिगेज ने जानकारी दी कि जिस शख्स ने गांव खरीदा था, वह उसने यहां एक होटल बनाने का सपना देखा था लेकिन यह सब रोक दिया गया। रॉनी ने कहा कि वह शख्स अब भी चाहेगा कि यहां होटल बने। गांव को www।idealista।com वेबसाइट पर बिक्री के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इसके 80 वर्षीय मालिक ने वेबसाइट पर कहा है, ''मैं इसे बेच रहा हूं क्योंकि मैं एक शहरी निवासी हूं और गांव का रखरखाव नहीं कर सकता।''

करीब हफ्तेभर पहले इस वेबसाइट के माध्यम से गांव को बिक्री के लिए रखा गया। तब से पचास हजार से ज्यादा विजिटर इसे देख चुके हैं। रोड्रीगेज के मुताबिक, अब तक करीब 300 लोगों ने गांव को खरीदने में रुचि दिखाई है। रूस, फ्रांस, बेल्जियम और ब्रिटेन से लोग इसके बारे में पूछ रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक संभावित खरीदार ने इसे रिजर्व करने के लिए पहले ही पैसा लगा दिया है।

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कैसे वीरान हो गया गांव?
सल्तो डी केस्त्रो गांव को एक बिजली उत्पादन कंपनी इबरडुएरो ने उन श्रमिकों के परिवारों के लिए बसाया था जिन्होंने 1950 के दशक की शुरुआत में इसके पास एक जलाशय बनाने का काम किया था। जलाशय के बनने के बाद लोग गांव से पलायन कर गए और 1980 के दशक के अंत में यह पूरी तरह वीरान हो गया।

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