पाकिस्‍तान मिलिट्री मारेगी TTP के आतंकियों को घेरकर, अफगानिस्‍तान तालिबान से बढ़ेगी दुश्‍मनी!

 
tehreek e taliban pakistan

TTP-Pakistan War: पाकिस्‍तान (Pakistan) एक बार फिर से तहरीक-ए-तालिबान (Tehreek-e-Taliban TTP) के आतंक से परेशान है। आए दिन होने वाले आतंकी हमलों ने सरकार और पाकिस्‍तान सेना (Pakistan Army) के सिर में दर्द कर दिया है। अब मिलिट्री ने तय किया है कि वह पूरे देश में टीटीपी के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन लॉन्‍च करेगी।

इस्‍लामाबाद। पाकिस्‍तान की सेना और सरकार को समझ में नहीं आ रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान (TTP) पर कैसे लगाम लगाई जाए। अब इसकी एक नई तरकीब निकाली गई है। नेशनल सिक्‍योरिटी कमेटी (NSC) ने उस मिलिट्री ऑपरेशन को मंजूरी दे दी है जिसके तहत देशभर में टीटीपी के आतंकियों को घेर-घेरकर मारा जाएगा। यह एक्‍शन प्‍लान साल 2014 की उसी राष्‍ट्रीय योजना का हिस्‍सा है जो पेशावर में आर्मी स्‍कूल पर हुए हमले के बाद शुरू की गई है। उस आतंकी हमले में 144 बच्‍चों और स्‍टाफ मेंबर्स की मौत हो गई थी। यह हमला टीटीपी की तरफ से ही अंजाम दिया गया था। उसके बाद एक खास ऑपरेशन चलाया गया था।

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अफगान तालिबान ने तोड़ा वादा
एनएससी की मीटिंग में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मौजूद थे। मीटिंग में तय हुआ है कि आतंकियों से किसी भी तरह की कोई बात नहीं होगी। मीटिंग में टॉप मिलिट्री लीडर्स भी मौजूद थे। सरकार की तरफ से विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो, वित्‍त मंत्री इश्‍हाक डार, योजना मंत्री अहसान इकबाल, पाकिस्‍तान आर्मी के मुखिया जनरल आसीम मुनीर, ज्‍वॉइन्‍ट चीफ्स ऑफ स्‍टाफ कमेटी के चेयरमैन जनरल सााहिर शमशाद मिर्जा भी मौजूद थे। कमेटी में अफगानिस्‍तान का भी जिक्र हुआ। पाकिस्‍तान की सरकार का मानना है कि सत्‍ता संभालने के बाद अफगान तालिबान ने जो वादा किया था, उसे पूरा करना पड़ेगा।

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डॉलर की स्‍मगलिंग
सरकार ने मीटिंग में तय किया है कि किसी भी तरह की घुसपैठ को बर्दाश्‍त नहीं किया जाएगा। मी‍टिंग में इस बात पर चर्चा हुई है कि अफगान तालिबान को बॉर्डर पर शांति कायम करनी ही पड़ेगी। डॉलर की स्‍मगलिंग करने वालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार की तरफ से इन ऑपरेशंस को सफलतापूर्वक चलाए जाने के लिए कानूनी एजेंसियों को हर जरूरी मदद मुहैया कराई जाएगी।

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टीटीपी ने खत्‍म किया सीजफायर
टीटीपी की शुरुआत साल 2007 में हुई थी और बैतुल्‍ला मसूद ने इसे शुरू किया था। यह ग्रुप खुद को अफगानिस्‍तान तालिबान का ही हिस्‍सा करार देता है। इसका सिर्फ एक मकसद है और वह है देश में इस्‍लामिक कानून को लागू कराना। टीटीपी इस समय उत्‍तरी वजीरिस्‍तान और खैबर में ज्‍यादा ताकतवर है और ये दोनों ही जगहें अफगानिस्‍तान बॉर्डर से सटी हुई हैं। टीटीपी की तरफ से पिछले दिनों अपने आतंकियों को निर्देश दिया है कि वो पाकिस्‍तानी सेना पर हमले जारी रखें। डॉन के मुताबिक अपनी आधिकारिक चिट्ठी में टीटीपी ने कहा है कि जहां भी मौका मिले, वहां हमले करो क्‍योंकि कई जगहों पर सेना मुजाहिद्दीनों को मार रही है।

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काबुल ने बिगाड़ा खेल
टीटीपी ने पिछले दिनों पाकिस्‍तान की सरकार के साथ हुए युद्धविराम समझौते को खत्‍म कर दिया है। टीटीपी उसी विचारधारा को मानता है जिसे अफगान तालिबान मानता है। पिछले साल जब अफगानिस्‍तान से अमेरिकी सेनाएं गईं और तालिबान ने सत्‍ता में वापसी की तो तत्‍कालीन पीएम इमरान खान का कहना था कि देश गुलामी की जंजीरों से आजाद हो चुका है। जब से काबुल में तालिबान का शासन हुआ है तब से ही पाकिस्‍तान में टीटीपी ताकतवर हो गया है। विशेषज्ञों की मानें तो पाकिस्‍तान के लिए स्थिति बहुत मुश्किल है।

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