Pakistan: सरकार-सेना के खिलाफ इमरान खान का आक्रामक रुख, अब ये करने की दी चेतावनी 

 
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रविवार को एक हादसे में एक महिला पत्रकार की मृत्यु के बाद इमरान खान ने अपना लॉन्ग मार्च रोक दिया था। सोमवार सुबह उन्होंने इसे दोबारा शुरू किया। इससे ठीक पहले एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि देश के सामने एक क्रांति का नजारा है। यह क्रांति पिछले छह महीनों से जारी है। 

 

नई दिल्ली। पाकिस्तान में अपनी लोकप्रियता की बार-बार पुष्टि होने से उत्साहित पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने मौजूदा लॉन्ग मार्च को देश में रही ‘क्रांति’ बता दिया है। रविवार को नेशनल असेंबली की एक और सीट के लिए हुए उप चुनाव में खान की लोकप्रियता की पुष्टि हुई, जहां सत्ताधारी गठबंधन के उम्मीदवार से से वे भारी बहुमत से आगे निकल गए। खुर्रम नाम की सीट पर खान ने एक बार फिर खुद को अपनी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का उम्मीदवार बनाया था। इसके पहले 16 अक्टूबर को आठ संसदीय सीटों के लिए हुए उप चुनाव में छह सीटें पीटीआई ने जीतीं। इन सभी सीटों पर भी इमरान खान ही उम्मीदवार थे। 

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रविवार को एक हादसे में एक महिला पत्रकार की मृत्यु के बाद इमरान खान ने अपना लॉन्ग मार्च रोक दिया था। सोमवार सुबह उन्होंने इसे दोबारा शुरू किया। इससे ठीक पहले एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि देश के सामने एक क्रांति का नजारा है। यह क्रांति पिछले छह महीनों से जारी है। यह कहने के बाद इमरान खान ने यह गंभीर सवाल उठाया- क्या यह मतपेटियों से होकर गुजरने वाली ‘सॉफ्ट’ क्रांति साबित होगी, या यह खून-खराबे में तब्दील होकर विनाशकारी बन जाएगी। 

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इमरान खान ने यह चेतावनी भरा ट्विट गृह मंत्री राना सनाउल्लाह के एक बयान के बाद दी है। सनाउल्लाह ने रविवार को कहा था कि इमरान खान के मार्च को तब तक इस्लामाबाद में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, जब तक उनसे यह आश्वासन नहीं मिल जाता कि इसे शांतिपूर्ण रखा जाएगा। एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि लॉन्ग मार्च को इस्लामाबाद में घुसने दिया जाएगा या नहीं, इस बारे में अभी फैसला नहीं किया गया है। इमरान खान ने लॉन्ग मार्च लाहौर से इस्लामाबाद तक के लिए निकाला है। 

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पर्यवेक्षकों की राय है कि सनाउल्लाह के बयान के बाद इमरान खान की ताजा चेतावनी सियासी घटनाक्रम के खतरनाक मोड़ लेने का संकेत है। लॉन्ग मार्च ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार के लिए बेहद चिंताजनक सूरत पैदा कर दी है। सत्ता पक्ष के साथ-साथ सेना और खुफिया तंत्र की तरफ से इमरान खान पर लगातार किए जा रहे हमलों के बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री की लोकप्रियता पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। यह बात लॉन्ग मार्च में भी जाहिर हो रही है, जिसमें अभूतपूर्व भीड़ जुटी है। 

पीटीआई ने कहा है कि हाल में आए तमाम उप चुनाव नतीजों से मौजूदा सरकार के प्रति जनता के अविश्वास की पुष्टि हुई है। पार्टी ने कहा है कि बीते अप्रैल में इमरान खान की सरकार गिराए जाने के बाद से देश में 37 सीटों के उप चुनाव हुए, जिनमें से 29 में पीटीआई विजयी रही है। यानी तीन चौथाई से भी ज्यादा जगहों पर पीटीआई को कामयाबी मिली है। 

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रविवार को प्रधानमंत्री शरीफ और सनाउल्लाह दोनों ने इमरान खान पर देश में अशांति फैलाने का आरोप लगाया। सनाउल्लाह ने खान के साथ किसी बातचीत की संभावना से भी इनकार किया है। उधर इमरान खान ने भी कहा है कि वे सरकार के साथ सिर्फ अगले आम चुनाव की तारीख के बारे में बातचीत कर सकते हैँ। विश्लेषकों की राय में दोनों पक्षों के इस सख्त रुख के बीच किसी शांतिपूर्ण समाधान की गुंजाइश फिलहाल नजर नहीं आ रही है। 

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