हाथ से लॉन्च होने वाली मिसाइल बनाई इजरायल ने , नाम दिया- प्वाइंट ब्लैंक; दुश्मन खेमे में यूं मचाएगी तबाही

 
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कंपनी की ओर से इस डिवाइस को प्वाइंट ब्लैंक नाम दिया गया है, जो कि एक छोटी सी इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल गाइडेड मिसाइल है। एक खास बात यह भी है कि इसे कोई सैनिक अपनी पीठ पर लेकर आराम से चल सकता है।

 

यरूशलम। इजरायल की सरकारी कंपनी इजरायल एरोस्‍पेस इंडस्‍ट्रीज (IAI) ने ऐसी मिसाइल विकसीत की है, जिसे हाथ से लॉन्च किया जा सकता है। कंपनी का कहना है कि यह मिसाइल बिना विस्फोट के भी सैनिक के हाथ में वापस आ सकती है। इतना ही नहीं, इसे ड्रोन जरिए भी लॉन्च किया जा सकता है। IAI ने अमेरिकी मार्केट के लिए यूएस के रक्षा विभाग के साथ इस मिसाइल को लेकर करार किया है। यह कॉन्ट्रैक्ट कई सालों के लिए और कई अरब डॉलर में हुआ है। 

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कंपनी की ओर से इस डिवाइस को प्वाइंट ब्लैंक नाम दिया गया है, जो कि एक छोटी सी इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल गाइडेड मिसाइल है। इसे कोई सैनिक अपनी पीठ पर लेकर भी चल सकता है। प्वाइंट ब्लैंक को महज एक सैनिक ही लॉन्च और ऑपरेट कर सकता है। इस तरह के हथियारों को 'आत्मघाती ड्रोन' या 'कामिकेज ड्रोन' के रूप में भी जाना जाता है। प्वाइंट ब्‍लैंक मिसाइल की तुलना ईरान के कामिकेज ड्रोन से भी की जा रही है। कंपनी का दावा है कि इसमें गलतियों की गुंजाइश न के बराबर है।

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कंपनी ने इस्तेमाल करके भी दिखाया
आईएआई की ओर से इस डिवाइस के इस्तेमाल को लेकर एक वीडियो जारी किया गया है, जिसमें एक व्यक्ति इसे लॉन्च करता नजर आ रहा है। इसे अपने टारगेट को सफलतापूर्वक भेदते हुए भी देखा जा सकता है। IAI के मुताबिक, इस डिवाइस का वजह 6.8 किलोग्राम है और यह 90 सेंटीमीटर (3 फीट) लंबी है। यह 460 मीटर (15,00 फीट) की ऊंचाई तक उड़ान भर सकती है और इसकी अधिकतम स्पीड 286 किमी प्रति घंटा (176mph) है। ऑपरेटर इसे अपने टारगेट के हिसाब से हवा में घुमा भी सकता है। 

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छोड़ने के बाद भी बुला सकते हैं वापस
प्वाइंट ब्लैंक को लेकर IAI का दावा है कि इसमें रीयल-टाइम में सर्विलांस इन्फॉर्मेशन के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम लगा हुआ है। टारगेट को नष्ट करने के लिए डिवाइस को गोला-बारूद से भी लैस किया गया है। कंपनी के मुताबिक, इस मिसाइल को छोड़ने के बाद अगर ऑपरेट को लगता है कि वह ऐसा नहीं करना चाहता है तो उसे वापस अपने हाथ में लैंड भी करा सकता है। IAI का कहना है कि यह कई अरब डॉलर वाला प्रोजेक्‍ट है जिसके तहत अमेरिकी रक्षा विभाग को नई मिसाइलें दी जानी हैं।

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