कोरोना के खतरे के बीच ब्रेन-ईटिंग अमीबा का खौफ, एक शख्स की दक्षिण कोरिया में हो चुकी मौत; जानें- लक्षण और खतरा

 
brain eating amoeba

कोच्चि के अमृता अस्पताल के संक्रामक रोग विभाग के डॉ दीपू टीएस कहते हैं, "अमीबा एककोशिकीय मुक्त जीव है। चूंकि इसकी कोई कोशिका भित्ति नहीं होती है,इसलिए यह जल निकायों की तरह पर्यावरण मे विचरण करता है।

नई दिल्ली। चीन में कोरोना वायरस संक्रमण की तबाही के बीच दक्षिण कोरिया में एक जानलेवा बीमारी ने पूरी दुनिया में दूसरी तरह का खौफ पैदा कर दिया है। थाईलैंड से लौटे दक्षिण कोरिया के 50 वर्षीय एक व्यक्ति का मस्तिष्क खाने वाले अमीबा से संक्रमित होने के बाद निधन हो गया। यह एक एक घातक संक्रमण है।

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संक्रमित व्यक्ति में थाईलैंड से आने पर शाम को सिरदर्द, बुखार, उल्टी, बोलने में कठिनाई और गर्दन में अकड़न जैसे लक्षण दिखाई देने लगे। अगले दिन उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों ने उसे नेगलेरिया फाउलेरी नामक घातक संक्रमण से पीड़ित बताया, जिसे आमतौर पर 'ब्रेन-ईटिंग अमीबा' कहा जाता है। दक्षिण कोरिया में यह इस तरह का पहला मामला है।

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ब्रेन-ईटिंग अमीबा क्या होता है?
कोच्चि के अमृता अस्पताल के संक्रामक रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ दीपू टीएस कहते हैं, "अमीबा एककोशिकीय मुक्त जीव है। चूंकि इसकी कोई कोशिका भित्ति नहीं होती है,इसलिए यह जल निकायों की तरह पर्यावरण में स्वतंत्र रूप से विचरण करता है और अन्य जीवाणुओं या मृत जीवों को खाता है। ब्रेन-ईटिंग अमीबा नेगलेरिया फाउलेरी, बोलचाल की भाषा में 'ब्रेन-ईटिंग अमीबा' के रूप में जाना जाता है,जो जीनस नेगलेरिया की एक प्रजाति है।"

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क्या ब्रेन-ईटिंग अमीबा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर सकता?
इस सवाल पर डॉ दीपू ने स्पष्ट करते हुए कहा, "नेगलेरिया फाउलेरी लोगों को तब संक्रमित करता है जब लोग अच्छी तरह से नहीं बनाए गए पूल/नदी में डुबकी लगाते हैं। अमीबा युक्त जल नाक के द्वारा व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करता है। ध्यान दें सिर्फ संपर्क से नेगलेरिया फाउलेरी संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैल सकता है।" 

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लक्षण
डॉ.दीपू ने इस बीमारी के लक्षणों के बारे में बताया, "नेगलेरिया फाउलेरी नाक के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुंचने के बाद, मस्तिष्क के संक्रमण का कारण बनता है जिसे प्राथमिक अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (PAM) कहा जाता है, जो मस्तिष्क के ऊतकों को नष्ट कर देता है।" उन्होंने बताया कि PAM का पहला लक्षण आमतौर पर संक्रमण के लगभग 5 दिन बाद दिखना शुरू होता है लेकिन वह 1 से 12 दिनों के भीतर शुरू हो सकता है। 

डॉ. दीपू ने कहा कि संक्रमित व्यक्ति में सिरदर्द, बुखार, मतली, या उल्टी आना इसके लक्षणों में शामिल हो सकते हैं। बाद के लक्षणों में गर्दन में अकड़न, भ्रम, लोगों और आसपास के लोगों पर ध्यान न देना, दौरे, मतिभ्रम और कॉमा में जाना भी शामिल हो सकता है। उन्होंने बताया कि लक्षणों के शुरू होने के बाद, रोग तेजी से बढ़ता है और आमतौर पर 5 दिनों के भीतर मौत का कारण बनता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि लेकिन मृत्यु 1 से 18 दिनों के भीतर हो सकती है।

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इलाज क्या है?
डॉ दीपू कहते हैं कि चूंकि PAM दुर्लभ है, और इसका संक्रमण इतनी तेजी से बढ़ता है, इसलिए इसके प्रभावी उपचार विकल्पों का अब तक पूरी तरह से पता नहीं लगाया जा सका है। हालांकि उन्होंने कहा कि कुछ दवाओं के असरदार होने के सबूत भी हैं लेकिन विज्ञान अभी भी इसकी दवा विकसित कर रहा है। डॉ. दीपू के मुताबिक, वर्तमान में, PAM का इलाज दवाओं के संयोजन के साथ किया जाता है, जिसमें एंटीबायोटिक्स एंटीफंगल और एंटी-परजीवी एजेंट शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मिल्टेफोसिन इन दवाओं में सबसे नई है। 

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