क्या शुरू कर दी चीन ने जंग की तैयारी? जिनपिंग ने दिए सेना को 'एक्शन मोड' में रहने के आदेश

 
xi jinping

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रिकॉर्ड तीसरी बार केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएसी) की कमान संभालने के साथ ही चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को युद्ध लड़ने और जीतने के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है। जिनपिंग ने कहा कि, "चीन की सुरक्षा अस्थिर और अनिश्चित होती जा रही है। इसलिए देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि हम अपनी सैन्य प्रशिक्षण को और मजबूत करें।"

 

नई दिल्ली। शी जिनपिंग को सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के महासचिव और केंद्रीय सैन्य आयोग ( सीएसी ) के प्रमुख के रूप में एक बार फिर पांच साल के लिए नियुक्त किया गया है। सीएमसी प्रमुख के रूप में तीसरे कार्यकाल का पदभार ग्रहण करते ही जिनपिंग दुनिया की सबसे बड़ी सेना ( 20 लाख ) को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया पिछले एक सदी से बहुत ही अधिक परिवर्तनों से गुजर रही है। जिसके कारण चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा बढ़ती अस्थिरता और अनिश्चितता का सामना कर रही है। जिनपिंग ने राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और विकास के लिए पार्टी और नागरिकों को ठीक से काम करने का निर्देश दिया है। वहीं, सेना को युद्ध की तैयारी के लिए अपनी सारी ऊर्जा लगा देना का आदेश दिया है। जिनपिंग ने सेना को एक्शन मोड में रहने के आदेश दिए हैं।

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कमान के तीर की तरह तैयार रहे चीनी सेना 
शी जिनपिंग के सेना संबोधन पर टिप्पणी करते हुए चीन के रिटायर्ड वायु सेना जनरल और सीएमसी के पूर्व उप चेयरमैन Xu Qiliang ने कहा कि चीनी आर्मी को शांतिकाल से युद्धकाल में तेजी से परिवर्तन होने के लिए तैयार रहना चाहिए। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक,  Xu Qiliang ने कहा कि चीनी आर्मी को हमेशा कमान के तीर की तरह तैयार रहना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके सैनिक हर समय लड़ने के लिए तैयार हैं। 

ऐसा अंदेशा जताया जा रहा है कि चीन ने यह फैसला ताइवान में बढ़ते राजनायिक दखल, भारत के साथ सीमा विवाद और अमेरिका के साथ विभिन्न मुद्दे को लेकर चल रहे गतिरोध को लेकर किया है। 

अगस्त में अमेरिकी संसद की निचली सदन की नेता नैंसी पोलिसी के ताइवान यात्रा के बाद से ही चीन खफा चल रहा है। चीन के कड़ी प्रतिक्रिया के बाद भी अमेरिकी नेता नैंसी पोलिसी ने ताइवान का दौरा किया था। जिससे खफा होकर चीन ने अमेरिका से कहा था कि आग से खेलना ठीक नहीं। पोलिसी की इस यात्रा के बाद चीन ने ताइवान जलडमरूमध्य में बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास किया था। आइए जानते हैं कि चीन किन-किन कारणों से सैन्य अभ्यास पर जोर दे रहा है।

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ताइवान को अमेरिका के समर्थन से चिंतित चीन 
अगस्त में नैंसी पोलिसी ने ताइवान यात्रा के दौरान वहां की राष्ट्रपति के साथ साझा बयान में कहा था कि अमेरिका ताइवान के समर्थन में एकजुट है। पोलिसी ने कहा था कि हम 43 साल से ताइवान के साथ खड़े हैं और ताइवान के किए हुए वादे को पूरा करेंगे। पोलोसी की यह यात्रा 25 सालों में किसी शीर्ष अमेरिकी नेता की पहली यात्रा थी। इस यात्रा के बाद से ही चीन खफा है। ताइवान की घेराबंदी करने के लिए चीनी सेना ने ताइवान के आस-पास भारी संख्या में नौसैनिक सैन्य अभ्यास किए थे।

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ब्रिटेन के व्यापार मंत्री का ताइवान दौरा
ऋषि सुनक के प्रधानमंत्री बनने के बाद ब्रिटेन के व्यवसाय मंत्री ने ताइवान का दौरा किया है। चीन ने इस दौरे पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह वन चाइना पॉलिसी का उल्लंघन है। व्यवसाय मंत्री ग्रेग हैंडस की यह यात्रा किसी उच्च स्तरीय ब्रिटिश मंत्री की पहली ताइवान यात्रा है। ब्रिटेन के मंत्री के इस दौरे का मकसद ताइवान के साथ व्यापार समझौता करना है और चीन इसी को लेकर विरोध करता रहा है। 

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चीन-ताइवान विवाद
ताइवान दक्षिण पूर्वी चीन तट से करीब 100 मील दूर है। चीन किसी भी देश का ताइवान के साथ राजनायिक संबंध को नकारता रहा है। 
चीन इसे अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। जबकि ताइवान खुद को अलग देश मानता है। ताइवान की जनसंख्या लगभग 23 मिलियन है। ताइवान का अपना संविधान है और यहां लोगों की चुनी हुई सरकार है। चीन और ताइवान का विवाद लगभग पिछले 74 सालों से चला आ रहा है। लेकिन हाल में ताइवान में बढ़ते राजनायिक दखल के बाद यह विवाद और तेज हो गया है।

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भारत के साथ सीमा विवाद 
जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय सेना के साथ झड़प का मामला भी अभी पूरी तरह से सुलझा नहीं है। इस झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच कई सालों से 12 जगहों पर विवाद चल रहा है। सितंबर 2022 में भारत और चीन के बीच 16वें दौर की वार्ता के बाद दोनों देशों की सेनाएं गोगरा हॉटस्प्रिंग से पीछे हटने के लिए राजी हुई है। 

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