China Taiwan Crisis: ताइवान कोई कसर नहीं छोड़ रहा चीन की बेइज्जती करने में, अब ड्रैगन के सबसे कट्टर दुश्मन को दिया आमंत्रण

 
China Taiwan Crisis

ताइपे। ताइवान में संसदों के एक समूह ने तिब्बत में मानवाधिकार की स्थिति को लेकर दलाई लामा की ताइपे यात्रा का आह्वान किया है। शुक्रवार को तिब्बती लोकतंत्र दिवस की 62वीं वर्षगांठ मनाते हुए, ताइवान संसद समूह ने मानवाधिकारों के विकास से संबंधित अन्य समूहों के साथ एक स्मारक कार्यक्रम आयोजित किया।

ताइवान और तिब्बत एक समान
तिब्बत के लिए ताइवान संसद समूह के अध्यक्ष लिन चांगज़ुओ ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, "हमें अन्य तिब्बती संघों और संगठनों के साथ और अधिक तिब्बती मित्र और संपर्क बनाने चाहिए।" उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि ताइवान और तिब्बत समान मूल्यों वाले दो मित्र समाज हैं और आशा करते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय तिब्बत में मानवाधिकार की स्थिति और निर्वासित तिब्बतियों के लोकतंत्र पर ध्यान देना जारी रखेगा।"

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31 अगस्त को रिपोर्ट जारी
कार्यक्रम में भाग लेने वाले समूहों ने झिंजियांग में चीन के गंभीर मानवाधिकारों के उल्लंघन की ओर इशारा करते हुए संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। 31 अगस्त को प्रकाशित संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों के मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर चीन को जमकर लताड़ लगाई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने शिनजियांग के पश्चिमी क्षेत्र में उइगर और अन्य जातीय अल्पसंख्यकों के लोगों को हिरासत में रखा है, जो मानवाधिकार के खिलाफ हैं।

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पहले भी ताइवान जा चुके हैं दलाई लामा
बतादें कि दलाई लामा पहले भी ताइवान का दौरा कर चुके हैं। दलाई लामा ने पहली बार 25 साल पहले 1997 में ताइवान का दौरा किया था। आखिरी बार दलाई लामा 2009 में ताइवान की यात्रा पर गए थे। इस दौरान उन्होंने दोबारा ताइवान की यात्रा करने की इच्छा जताई थी। हालांकि, अब अगर दलाई लामा, ताइवान की यात्रा करते हैं तो चीन इसका कड़ा विरोध कर सकता है।

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ताइवान पर चीन जताता है अपना दावा
चीन दलाई लामा को एक अलगाववादी नेता मानता है और लोकतांत्रिक देश ताइवान को अपने भूभाग के तौर पर देखता है। तिब्ब्ती धर्मगुरू दलाई लामा का ताइवानी नेताओं से घनिष्ट संबंध रहा है। तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाईलामा ने नागरिक अधिकारों की वकालत करने वाले ताइवान के पूर्व राष्ट्रपति ली तेंग-हुई के निधन पर दुख व्यक्त किया था।

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