अनवर इब्राहिम होंगे मलेशिया के नए प्रधानमंत्री, भारत के लिए कितने ठीक?

 
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अनवर इब्राहिम मलेशिया के नए प्रधानमंत्री होंगे। सुल्तान अब्दुल्ला अहमद शाह ने अनवर को नए प्रधानमंत्री बनाने की मंजूरी दी है। बीते शनिवार को हुए आम चुनाव में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिली थी जिसके बाद से देश में राजनीतिक संकट चल रहा था। लेकिन अब अनवर इब्राहिम के नाम पर मुहर लग गई है। राजनीतिक अस्थिरता की वजह से पिछले चार सालों में मलेशिया में तीन बार आम चुनाव हो चुके हैं।

नई दिल्ली। मलेशिया के सुल्तान अब्दुल्ला अहमद शाह ने अनवर इब्राहिम को नए प्रधानमंत्री बनने की मंजूरी दे दी है। पिछले सप्ताह शनिवार को हुए आम चुनाव में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के कारण एक बार फिर सरकार बनाने को लेकर संकट पैदा हो गया था। 2018 से लेकर अब तक मलेशिया में तीन प्रधानमंत्री चुनाव हो चुके हैं। सुल्तान ने घोषणा की है कि अनवर इब्राहिम गुरुवार शाम प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे।

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अनवर इब्राहिम का प्रधानमंत्री बनना इसलिए भी मायने रखता है क्योंकि ये इस्लामिक बेहतरी के बजाय सभी देशों से बेहतर संबंध रखने में विश्वास रखते हैं। अनवर इब्राहिम को सुधारवादी नेता के रूप में जाना जाता है।

अनवर इब्राहिम के प्रधानमंत्री बनने से मलेशिया में राइट विंग राजनीति के उदय को कम करने में मदद मिलेगी। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि यह सरकार पिछले सरकार के तुलना में बेहतर शासन चलाएगी। अनवर इब्राहिम के प्रधानमंत्री बनने के बाद हिंसा की आशंका को देखते हुए पुलिस ने देशभर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। 

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भारत को लेकर नरम रुख
अक्टूबर 2019 में मलेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री महातीर मोहम्मद की ओर से कश्मीर राग छेड़े जाने पर अनवर इब्राहिम ने कहा था कि मलेशिया को भारत के साथ मतभेदों को मैत्रीपूर्ण तरीके से हल करना चाहिए। महातीर मोहम्मद द्वारा कश्मीर को लेकर दिए गए विवादित बयान के बाद दोनों देशों के बीच राजनायिक और कारोबारी रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे। महातीर ने भारत पर आरोप लगाया था कि भारत ने जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण कर कब्जा किया है। 

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कौन है अनवर इब्राहिम
1957 में ब्रिटेन से आजाद होने के बाद 2018 में पहली बार मलेशिया में किसी सुधारवादी गठबंधन ने जीत हासिल की थी। इस गठबंधन का नेतृत्व अनवर इब्राहिम कर रहे थे। लेकिन मुहीद्दीन ने पार्टी से अलग होकर यूएमएनओ से हाथ मिला लिया था। अनवर इब्राहिम 1990 के दशक में देश के उपप्रधानमंत्री रह चुके हैं। 75 वर्षीय अनवर सोडोमी और भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भी जा चुके हैं।

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किसी को भी पूर्ण बहुमत नहीं
शनिवार को हुए आम चुनाव में अनवर की गठबंधन पार्टी (उम्मीदों का गठबंधन) 82 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही। जो कि बहुमत के लिए जरूरी 112 सीटों से काफी कम है। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री मुहीद्दीन यासीन की गठबंधन पार्टी (राष्ट्रीय गठबंधन) ने 73 सीटों पर जीत दर्ज की जिसमें उनके सहयोगी मलय-केंद्रित नेशनल पार्टी ने सर्वाधिक 49 सीटों पर जीत दर्ज की है। यूनाइटोड मलय आर्गेनाइजेशन (यूएमएनओ) नेतृत्व वाले गठबंधन को 30 सीटें मिली हैं। ऐसा माना जा रहा था कि सत्ता की चाबी यूएमएनओ गठबंधन के पास है। 

यूएमएनओ ने शुरुआत में अनवर को समर्थन देने से इनकार कर दिया था। लेकिन किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं आने के कारण मलेशिया के सुल्तान ने एकता सरकार बनाने का प्रस्ताव दिया था जिसके बाद यूएमएनओ ने एकता सरकार को समर्थन देने की बात कही है।

यूएमएनओ के सेक्रेट्री जनरल अहमद मसलन ने कहा कि पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लाने वाली टीम ने फैसला किया है कि हमारा गठबंधन पूर्व प्रधानमंत्री मुहीद्दीन कैंप के अलावा किसी भी एकता सरकार को समर्थन देगी। अहमद मसलन ने कहा कि सुल्तान द्वारा गठित किसी भी सरकार को पार्टी समर्थन करेगी।

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विपक्ष ने हार से किया इनकार
मुहीद्दीन के गठबंधन PAS में मलेशिया की कट्टर इस्लामिक पार्टी शामिल है। पीएएस गठबंधन ने आम चुनाव में 20 सीटें जीती हैं जो 2018 के चुनाव में जीती गई सीटों से दोगुनी से भी अधिक है। पीएएस देश के शरिया इस्लाम का समर्थन करती है। पीएएस नेता अब्दुल हादी अवांग ने हार स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि हमारी पार्टी अभी भी आगे है। साजिश का आरोप लगाते हुए अब्दुल हादी ने कहा, "हम अब भी सही हैं। ईश्वर ने चाहा तो हम सुरक्षित रहेंगे, देश सुरक्षित रहेगा।"

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