विश्व एंटीमाइक्रोबियल जागरूकता सप्ताह 18 से 24 नवम्बर तक, चिकित्सा मंत्री ने पोस्टर विमोचन कर किया शुभारम्भ 

- चिकित्सक की सलाह के बिना किसी भी दवा का सेवन नहीं करें- चिकित्सा मंत्री
 
विश्व एंटीमाइक्रोबियल जागरूकता सप्ताह 18 से 24 नवम्बर तक, चिकित्सा मंत्री ने पोस्टर विमोचन कर किया शुभारम्भ 

जयपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री परसादी लाल मीणा ने शुक्रवार को अपने राजकीय आवास से रोगाणुरोधी प्रतिरोध के जागरूकता पोस्टर का विमोचन किया। उन्होंने गुब्बारे उड़ाकर वर्ल्ड एंटीमाइक्रोबियल अवेयरनेस वीक (18 से 24 नवम्बर) का शुभारम्भ किया।

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चिकित्सा मंत्री ने आमजन से अपील की है कि चिकित्सक की सलाह के बिना किसी भी दवा का सेवन नहीं करें, चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवा का कोर्स पूरा करें तथा बची हुयी दवाई न तो किसी अन्य को दें और न ही डॉक्टर की सलाह के बिना स्वयं इसका सेवन करें। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचने के लिए अपने आसपास स्वच्छता रखें तथा गुणवत्तायुक्त स्वच्छ पौष्टिक भोजन का सेवन करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान योजना के तहत सभी राजकीय चिकित्सा संस्थानों में सभी प्रकार की आईपीडी एवं ओपीडी सेवाएं प्रदेशवासियों के लिए निःशुल्क उपलब्ध हैं।

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इस दौरान मिशन निदेशक एनएचएम सुधीर शर्मा, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. के.एल.मीणा, आईडीएसपी के स्टेट नोडल अधिकारी डॉ प्रवीण असवाल, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की सीनियर प्रोफेसर डॉ. भारती मल्होत्रा, एंटीमाइक्रोबियल रेसिसटेंस कार्यक्रम की स्टेट कॉर्डिनेटर रूचि सिंह सहित निदेशालय के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम का आयोजन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग एवं इस कार्यक्रम के डवलपमेंट पार्टनर पाथ के सहयोग से किया जा रहा है।

इस एक सप्ताह के दौरान रोगाणुरोधी प्रतिरोध के प्रति आमजन को जागरूक करने के लिए प्रदेशभर में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे। प्रदेशस्तरीय कार्यक्रमों के साथ-साथ जिला स्तर पर क्वीज और शपथ कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे, ताकि लोग एंटीमाइक्रोबियल रेसिसटेंस के प्रति जागरूक हो।

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क्या है एंटीमाइक्रोबियल रेसिसटेंस
एंटीमाइक्रोबियल रेसिसटेंस या रोगाणुरोधी प्रतिरोध एक ऐसी स्थिति है जिसमें रोग पैदा करने वाले रोगाणु जैसे बैक्टीरिया, वायरस, फंजाई तथा पैरासाइट दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं। आम बोलचाल की भाषा में किसी सूक्ष्मजीव (वायरस, बैक्टीरिया आदि) के संक्रमण के ईलाज के लिए प्रयुक्त होने वाली दवा के प्रति उस सूक्ष्मजीव दवारा प्रतिरोध क्षमता हासिल कर लेना ही एंटीमाइक्रोबियल रेसिसटेंस है। इसके परिणामस्वरूप मानक उपचार अप्रभावी या कम असरदार रहते हैं तथा इससे बीमारी के फैलने तथा मृत्यु की संभावना रहती है। दवाओं के कम प्रभावी रहने से यह संक्रमण शरीर में बना रह जाता है तथा दूसरों में फैलने का खतरा बरकरार रहता है। इससे इलाज की लागत बढ़ती है तथा मृत्युदर में इजाफा होने की संभावना बनी रहती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एंटीमाइक्रोबियल रेसिसटेंस को वैश्विक स्वास्थ्य के लिए शीर्ष 10 खतरों में से एक के रूप में पहचाना है। ग्लोबल एंटीमाइक्रोबियल रेसिसटेंस सर्विलांस सिस्टम के डाटा के अनुसार महत्वपूर्ण एंटीमाइक्रोबियल के प्रति प्रतिरोध क्षमता में वैश्विक स्तर पर इजाफा हो रहा है।

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आमजन में रोगाणुरोधी प्रतिरोध के प्रति जागरूकता लाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वैश्विक कैम्पेन के रूप में प्रदेश में 18 से 24 नवम्बर तक वर्ल्ड एंटीमाइक्रोबियल रेसिसटेंस अवेयरनेस वीक का आयोजन किया जा रहा है। डब्ल्यूएचओ द्वारा इस वर्ष की थीम ‘‘प्रिवेंटिव एंटीमाइक्रोबियल रेसिसटेंस टूगेदर’’ निर्धारित की गयी है।

रोगाणुरोधी प्रतिरोध से बचने के उपाय
डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक (एंटीमाइक्रोबियल) का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। चिकित्सक ने दवा जितने दिन के लिए और जितनी मात्रा में लिखी है उसका कोर्स पूरा करें। यदि आप कुछ दवा का प्रयोग करने के बाद बेहतर महसूस कर रहे है तो भी कोर्स पूरा करें क्योंकि दवा लेने से प्रारम्भिक स्तर पर हमारे शरीर में आराम तो आ जाता है लेकिन संक्रमण पैदा करने वाले सूक्ष्मजीव पूरी तरह खत्म नहीं होते हैं। कोर्स बीच में छोड़ने से यह सूक्ष्मजीव धीरे-धीरे उस दवा के प्रति प्रतिरोध क्षमता हासिल कर लेते हैं और अगली बार जब हम बीमार होते हैं तो वह दवा पूरी तरह असरदार नहीं होती है।

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एंटीमाइक्रोबियल रेसिसटेंस फ्री राजस्थान के लिए राजस्थान सरकार द्वारा ऐतिहासिक कदम उठाते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को मबजूत करने के विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। इस सप्ताह के दौरान सोशल मीडिया पर भी विशेष जागरूकता अभियान चलाया जायेगा।

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