राजभवन में आगन्तुकों के लिए लागू होगा स्वागत ऑनलाइन सॉफ्टवेयर, जनजातीय क्षेत्र के गांव 49 आदर्श ग्राम के रूप में होंगे विकसित 

- सुव्यवस्थित प्रबंधन के लिए ‘स्टेट यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम’ (एसयूएमएस) लागू होगा
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु ‘ई-समीक्षा’ तंत्र विकसित होगा
- तीन वर्षों में संविधान की संस्कृति की जागरूकता के लिए कार्य किया - राज्यपाल
 
राजभवन में आगन्तुकों के लिए लागू होगा स्वागत ऑनलाइन सॉफ्टवेयर, जनजातीय क्षेत्र के गांव 49 आदर्श ग्राम के रूप में होंगे विकसित 

जयपुर। राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात करने आने वाले आगन्तुकों के लिए राजभवन में स्वागत ऑनलाइन अपॉइन्टमेंट सॉफ्टवेयर लागू किया जाएगा और जनजातीय क्षेत्र के 49 गांवों को आदर्श ग्रामों के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रदेश में विश्वविद्यालयों के सुव्यवस्थित प्रबंधन के लिए राज्य सरकार के सहयोग से ‘स्टेट यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम’ (एसयूएमएस) लागू होगा। राजभवन की पहल पर विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवाचारों की मोनिटरिंग हेतु ‘ई-समीक्षा’ तंत्र भी विकसित होगा।

राज्यपाल ने अपने कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे होने के अवसर पर शुक्रवार को यहॉ राजभवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में भावी कार्य योजना और प्राथमिकताओं को लेकर बात रखी। उन्होंने कहा कि राजस्थान में अपने कार्यकाल के बीते तीन वर्षों में उन्होंने संविधान की संस्कृति की जागरूकता के लिए निरंतर कार्य किया है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी संविधान की मूल भावना और उच्च आदर्शों के बारे में जान-समझ सके, इस उद्देश्य से उन्होंने प्रदेश के राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालयों में संविधान पार्कों के निर्माण की पहल की है। उन्होंने कहा कि इसी क्रम में विधानसभा में अभिभाषण से पहले संविधान की उद्देशिका और मूल कर्तव्यों के वाचन की नई परम्परा का सूत्रपात किया गया।

राजभवन में जल्द पूरा होगा संविधान पार्क
उन्होंने कहा कि राजभवन प्रदेश के संवैधानिक प्रमुख का आवास होता है, इस नाते यहां संविधान समिति के गठन से लेकर संविधान के निर्माण और इसे लागू किए जाने तक की सम्पूर्ण यात्रा के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाक्रमों को राजभवन में बन रहे संविधान पार्क में प्रदर्शित किया जा रहा है, जो शीघ्र ही बनकर तैयार हो जाएगा।

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जनजातीय क्षेत्र में आवंटित बजट का शत-प्रतिशत उपयोग हो
राज्यपाल ने कहा कि जनजाति उपयोजना क्षेत्र में आवंटित बजट का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा ताकि जनजातीय क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को दूर करते हुए उन्हें शिक्षा और रोजगार के पर्याप्त अवसर सुनिश्चित हो सकें। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्र में संचालित आवासीय विद्यालयों, आश्रम छात्रावासों में रिक्त पदों को भरने की त्वरित कार्यवाही करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि टीएसपी क्षेत्र के विद्यार्थियों को सरकारी नौकरी और उच्च शिक्षा की कोचिंग देने के लिए आधारभूत ढांचा तैयार किया जा रहा है। जनजातीय क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल एवं प्रशिक्षण सुविधाओं के लिए भी कार्य किया गया है।

नई शिक्षा नीति और एक समान पाठ्यक्रम
मिश्र ने कहा कि विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए कुलपति समन्वय समिति एवं टास्क फोर्स का गठन कर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में नई शिक्षा नीति समग्रता में लागू करने के लिए कार्यशाला का आयोजन कर समयबद्ध कार्य किया जा रहा है। साथ ही विश्वविद्यालयों में एक समान पाठ्यक्रम लागू करने के लिए पाठ्यक्रमों को अद्यतन करने का निर्णय भी लिया गया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की अपने संसाधनों द्वारा आय का स्रोत बढ़ाने के लिए रोडमैप तैयार करने की कार्यवाही भी की जा रही है। इन कार्यों से उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार के सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

भूतपूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए कार्य
राज्यपाल ने कहा कि भूतपूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों के लिए जयपुर में सैनिक कल्याण भवन का निर्माण करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भूतपूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों की समस्याओं के निराकरण और उन्हें लाभान्वित करने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था विकसित की जाएगी। उन्होंने कहा कि भूतपूर्व सैनिकों को प्रदत्त विभिन्न भत्तों, छात्रवृत्ति राशि तथा चिकित्सकीय आर्थिक सहायता में वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि रेडक्रॉस संस्था की जिला इकाइयों को फिर से सक्रिय करने और भामाशाहों को जोड़कर राज्यपाल राहत कोष को गति प्रदान करने का कार्य भी किया गया है।

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लोक कलाओं और विरासत का संरक्षण
मिश्र ने कहा कि प्रदेश की लोक कलाओं और विरासत के संरक्षण के लिए भी राजभवन द्वारा ‘कला संवाद’ के आयोजन और पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के माध्यम से मंच प्रदान कर विशेष पहल की गई। उन्होंने कहा कि बांसवाड़ा के गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय में वैदिक शोध पीठ की स्थापना कर ऋग्वेद की शांखायनी शाखा की ऋचाओं के सस्वरगान की परम्परा को सहेजा जा रहा है।

‘‘संकल्प से सिद्धि‘‘ और ‘‘अप्प दीपो भव‘‘ पुस्तकों का लोकार्पण
राज्यपाल ने तीन वर्ष के कार्यकाल पर आधारित ‘‘संकल्प से सिद्धि-प्रतिबद्धता के तीन वर्ष‘‘ पुस्तक, उनके भाषणों एवं व्याख्यानों के संकलन ‘‘अप्प दीपो भव‘‘ और अंग्रेजी पुस्तक ‘‘कंस्टीट्यूशन, कल्चर एण्ड नेशन‘‘ का लोकार्पण भी किया।‘‘संकल्प से सिद्धि‘‘ पुस्तक में राज्यपाल मिश्र द्वारा संवैधानिक प्रतिबद्धता के लिए  किये गये नवाचारों, जनजातीय क्षेत्र के लोगों के कल्याण, उच्च शिक्षा के उन्नयन, स्काउट गाइड संस्था, राज्यपाल राहत कोष को पुनः सक्रिय करने के लिए किये गए कार्यों तथा राजभवन के सामाजिक सरोकारों सहित विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी गई है। ‘‘अप्प दीपो भव‘‘ पुस्तक में राज्यपाल मिश्र द्वारा समय-समय पर दिए गए व्याख्यानों और भाषणों का संकलन है।

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