चिकित्सा विभाग की समीक्षा बैठक: चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में राजस्थान बन रहा मॉडल स्टेट- मुख्यमंत्री

- चिरंजीवी योजना के बारे में जागरूकता के लिए 2 अक्टूबर से होंगी ग्राम सभाएं
- बजट का 7 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करने वाला राजस्थान अग्रणी राज्य
- प्रदेश के 30 जिलों में अब मेडिकल कॉलेज तथा सभी जिलों में राजकीय नर्सिंग कॉलेज
 
चिकित्सा विभाग की समीक्षा बैठक: चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में राजस्थान बन रहा मॉडल स्टेट- मुख्यमंत्री

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता एवं संवेदनशीलता के साथ प्रदेशवासियों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा देने की दिशा में कार्य कर रही है और इसी का परिणाम है कि राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में मॉडल स्टेट बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान योजना तथा मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं प्रारम्भ की हैं। इसी क्रम में गहलोत ने सड़क दुर्घटना पीडितों की जीवन रक्षा के लिए मुख्यमंत्री चिरंजीवी जीवन रक्षा योजना की शुरूआत की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि इन सभी योजनाओं का धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन हो। योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए ताकि जानकारी के अभाव में कोई इनके लाभ से वंचित न रहे। साथ ही, प्रभावी क्रियान्वयन के लिए योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग एवं समय-समय पर जनता का फीडबैक लिया जाना चाहिए।

गहलोत मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास पर चिकित्सा विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान स्वास्थ्य सेवाओं में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभर रहा है। राज्य में बजट का 7 प्रतिशत हिस्सा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किया जा रहा है। राजस्थान में 88 प्रतिशत परिवार हैल्थ इन्श्योरेंस के अर्न्तगत आते हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर इसका औसत मात्र 41 प्रतिशत है। आज प्रदेश में एमआरआई, सीटी स्केन जैसी महंगी जांचों के साथ-साथ लीवर ट्रांसप्लांट, बोनमैरो ट्रांसप्लांट जैसा महंगा इलाज निःशुल्क करवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 21.14 लाख मरीजों को 2111.41 करोड़ रूपए के निःशुल्क उपचार से लाभांवित किया जा चुका है। निजी अस्पतालों को 21 दिन के अंदर भुगतान किया जा रहा है।

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चिरंजीवी योजना के बारे में जागरूकता के लिए 2 अक्टूबर को होंगी ग्राम सभाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिरंजीवी योजना के माध्यम से प्रदेशवासियों को महंगे इलाज के भार से मुक्त करने का कार्य किया गया है। कॉकलियर इम्प्लांट, बोनमैरो ट्रांसप्लांट, ऑर्गन ट्रांसप्लांट, ब्लड, प्लेट्लेट्स एवं प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन जैसी जटिल स्वास्थ्य सेवाएं भी इस योजना के माध्यम से निःशुल्क कर दी गई हैं। आज पूरे भारत में इस योजना की चर्चा हो रही है। अधिकतम लोगों तक इसका लाभ पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर इसका प्रचार आवश्यक है। इसके लिए 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर प्रदेशभर में ग्राम सभाएं आयोजित कर आमजन तक इस योजना के बारे में जानकारी पहुंचाई जाएगी। इन ग्राम सभाओं में अधिकारी व अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहकर आमजन को चिरंजीवी योजना के बारे में जागरूक करेंगे। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन योजना के प्रचार-प्रसार हेतु पत्रकारों के साथ-साथ सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स के साथ भी समन्वय करें व स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार अन्य नवाचार भी करें।

मुख्यमंत्री ने लॉन्च की मुख्यमंत्री चिरंजीवी जीवन रक्षा योजना
मुख्यमंत्री ने बैठक में मुख्यमंत्री चिरंजीवी जीवन रक्षा योजना की शुरूआत के साथ ही बुकलेट का भी विमोचन किया। उन्होंने कहा कि इस योजना का ट्रायल रन 22 जून 2022 से शुरू किया गया था। जिसके अंतर्गत अब तक 1.23 करोड़ रूपए के उपचार से 700 मरीजों को लाभांवित किया जा चुका है। योजना के अंतर्गत सड़क दुर्घटना में देश के किसी भी राज्य का निवासी घायल व्यक्ति बिना किसी एफआईआर अथवा औपचारिकता के मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना से संबद्ध निजी एवं सरकारी अस्पतालों में 72 घंटों तक निशुल्क उपचार प्राप्त कर सकता है। इसके लिए चिरंजीवी योजना का पात्र होना आवश्यक नहीं है। 72 घंटे के उपरांत गैर चिरंजीवी लाभार्थी मरीज को राजकीय अस्पताल में रैफर किया जाएगा अथवा मरीज स्वेच्छा से निजी अस्पताल में अपने खर्च पर उपचार प्राप्त कर सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक एवं नर्सिंग समुदाय पूर्ण सेवा भावना के साथ इस महत्वाकांक्षी योजना को सफल बनाने में जुटे जिससे राजस्थान स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन सके।

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चिकित्सा शिक्षा में राजस्थान बढ़ रहा आगे
बैठक में बताया गया कि बजट में घोषित किए गए 16 चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। इनमें से 15 में महाविद्यालय के साथ-साथ चिकित्सालयों के निर्माण का कार्य भी चल रहा है। विभिन्न जिलों में 26 नर्सिंग कॉलेज बनाने का कार्य भी प्रगति पर है, जिनके निर्माण उपरांत प्रदेश के सभी जिलों में राजकीय नर्सिंग कॉलेज स्थापित हो जाएंगे। इनमें से 7 नर्सिंग कॉलेज जीएनटीसी भवनों से गत वर्ष प्रारंभ कर दिए गए हैं तथा 19 कॉलेज इस वर्ष से प्रारंभ कर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने तथा सभी जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य पूरा करने के साथ-साथ शिक्षकों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। दूर-दराज के क्षेत्रों में पढ़ाने के लिए स्मार्ट क्लासेज एवं टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों का सहारा लिया जाए।

राज्य में तैयार हो रहा उत्कृष्ट स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर
गहलोत ने कहा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र राज्य सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आमजन को गांव-ढाणी में बेहतरीन चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार तत्परता के साथ कार्य कर रही है। राज्य में नए 337 प्राथमिक तथा 194 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खोले गए हैं। सभी स्वास्थ्य केन्द्रों एवं चिकित्सालयों में कार्यभार के अनुसार चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ की नियुक्ति की जा रही है। साथ ही, प्रसव सुविधाओं को और मजबूत किया गया है जिससे राज्य में मातृ एवं शिशु मृत्युदर में क्रमशः 304 एवं 37.7  की कमी आई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ‘राइट टू हैल्थ’ की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि राइट टू हैल्थ बिल को जल्द ही अन्तिम रूप दिया जाएगा। इस बिल में रोगियों के हित में आवश्यक सभी प्रावधान सम्मिलित किए जाएंगे।

बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री परसादी लाल मीणा, मुख्य सचिव उषा शर्मा, प्रमुख शासन सचिव वित्त अखिल अरोरा, प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा शिक्षा  वैभव गालरिया, शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. पृथ्वी राज, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त डॉ. घनश्याम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही, प्रदेश के सभी जिलों से जिला कलक्टर, समस्त मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल, सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं प्राथमिक चिकित्सा अधिकारी वीसी के माध्यम से जुड़े। 

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