गौवंश को लम्पी से बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता, औषधियों की पर्याप्त आपूर्ति के साथ तेजी से हो रहा टीकाकरण- पशुपालन मंत्री

इस बीमारी का पता लगते ही उन्होंने यह प्रयास सुनिश्चित किए कि गौवंश की हानि को रोका जाए। 

 
Lumpy skin disease

जयपुर। पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि लम्पी स्किन बीमारी से गौवंश को बचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए पूरी सजगता और सतर्कता के साथ हरसंभव प्रयास सुनिश्चित किया जा रहा है। इस गंभीर बीमारी की रोकथाम के लिए औषधियों की पर्याप्त आपूर्ति के साथ ही गौवंश का तेजी से टीकाकरण किया जा रहा है। 

कटारिया मंगलवार को राज्य विधानसभा में लम्पी रोग के संबंध में हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि सदन में सदस्यों ने इस बीमारी को लेकर जो चिंता जाहिर की है और सुझाव दिए हैं, उन पर राज्य सरकार गंभीरता से अमल करेगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस रोग की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों को और बेहतर करने के साथ ही इससे जुड़ी तमाम व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाएगा।  

कटारिया ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गौवंश में तेजी से फैल रही इस बीमारी को लेकर बेहद गंभीर हैं। इस बीमारी का पता लगते ही उन्होंने यह प्रयास सुनिश्चित किए कि गौवंश की हानि को रोका जाए। इसके लिए उन्होंने 15 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सभी जनप्रतिनिधियों से संवाद कर लम्पी स्किन बीमारी के प्रति जनजागरूकता का आह्वान किया और पशु चिकित्सा सुविधा के लिए 30 करोड़ रुपए की राशि जारी की। 

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उन्होंने कहा कि लम्पी स्किन बीमारी से पशुधन को बचाने के लिए राज्य सरकार की ओर से कोई कोताही नहीं बरती जा रही है। राज्य में लम्पी रोग की पुष्टि होने पर पशुपालन विभाग ने 12 मई, 2022 को ही गाइड लाइन जारी कर बीमारी की रोकथाम एवं गौवंश को बचाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए थे। सभी पशु चिकित्सा केन्द्रों पर दवाइयों की निरन्तर पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है और टीकाकरण की गति को लगातार बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, भामाशाहों एवं गौ सेवकों ने बीमारी की रोकथाम और गौवंश को बचाने के लिए भरपूर सहयोग किया है, उन्हें सम्मानित किया जाएगा।  

पशुपालन मंत्री ने कहा कि गोट पॉक्स टीकों की पूरी राशि राज्य सरकार की ओर से वहन की जा रही है। केन्द्र सरकार के साथ भी राज्य सरकार निरंतर समन्वय बनाए हुए है। केंद्र से टीकों की आपूर्ति में पूर्ण सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा कार्मिकों की कमी दूर करने के लिए 200 पशु चिकित्सक अर्जेंट टेम्परेरी बेसिस (यूटीबी) पर नियुक्त किए गए हैं। 300 पशुधन सहायकों की भी यूटीबी पर नियुक्ति की जा रही है। उन्होंने बताया कि 1436 पशुधन सहायकों की भर्ती प्रक्रिया पूर्ण होने वाली है, जिनमें से 730 पशुधन सहायकों को फील्ड में नियुक्त कर दिया है, चयन बोर्ड से सूची आते ही शेष पदों पर भी शीघ्र नियुक्ति दे दी जाएगी। साथ ही 900 पशु चिकित्सकों की भर्ती के लिए परीक्षा कराकर दस्तावेज सत्यापन का कार्य किया जा चुका है, हाईकोर्ट से अनुमति मिलते ही तुरंत यह पद भर दिए जाएंगे। 

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पशु चिकित्सा इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने पर फोकस
कटारिया ने कहा कि भैंसों के भी लम्पी स्किन बीमारी से प्रभावित होने की रिपोर्ट मिली है, जिसे लेकर सरकार सजग है। बरसात रुकने के साथ ही इस बीमारी से राहत मिलने की उम्मीद है। पशुपालन मंत्री ने कहा कि विशेषज्ञों ने लम्पी वायरस के वेरियंट के बदलने की आशंका जताई है, जो चिंताजनक है। इससे निपटने के लिए पशु चिकित्सा इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। नए पशु चिकित्सा केन्द्र खोलने एवं पशु चिकित्सा कार्मिकों की भर्ती के बाद अब राज्य में 500 से अधिक पशु एंबुलेंस की खरीद की जा रही है। उन्होंने कहा कि विधायक कोष से पशु एंबुलेंस खरीदना भी शीघ्र अनुमत हो जाएगा। 

गौशालाओं को 2 हजार करोड़ से अधिक का अनुदान दिया
कटारिया ने कहा कि राज्य सरकार गायों को लेकर हमेशा संवेदनशील रही है। सरकार बनते ही मुख्यमंत्री ने गौशालाओं का अनुदान छह महीने से बढ़ाकर नौ महीने किया। वर्तमान राज्य सरकार ने पिछले चार साल में गौशालाओं को 2 हजार करोड़ से अधिक का अनुदान दिया है, जो पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान पांच साल में दिए 499 करोड़ रुपए से चार गुणा अधिक है। 

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पशुधन बीमा योजना पुनः शुरू करने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी होगी 
पशुपालन मंत्री ने पशुधन बीमा योजना पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि गत सरकार के कार्यकाल के दौरान बंद हुई इस योजना को पुनः शुरू करने की प्रक्रिया महीनेभर में पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने बताया कि गत सरकार के समय सितम्बर, 2018 से ही यह योजना बंद हो गई थी। हमने इस योजना को चालू करने के लिए भरसक प्रयास किए, लेकिन केन्द्र सरकार की ओर से अनुमत प्रीमियम राशि पर पशुओं का बीमा करने के लिए कोई कंपनी तैयार नहीं हुई। केन्द्र सरकार से कई बार प्रीमियम राशि बढ़ाने का आग्रह करने पर वर्ष 2021-22 में प्रीमियम राशि में वृद्धि की गई। इसके बाद दो कंपनियों ने पशु बीमा करने में रुचि दिखाई है, जिनके साथ एमओयू कर लिया है और आगामी एक महीने में पशु बीमा करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। कटारिया ने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने 150 करोड़ रुपए खर्च कर छह लाख पशुओं का बीमा करने की घोषणा की थी, जिसकी प्रक्रिया भी जल्द पूरी कर ली जाएगी। 

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