Fake Medical Report : झूठे मुकदमों में फंसाने वाला सरकारी डॉक्टर अब कानून के शिकंजे में!

'नकली चोट-असली केस' की आहट अब चूरू जिले में भी, एसपी के आदेश से राजगढ़ सीएचसी के डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज
 
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चूरू। कुछ वर्ष पूर्व सीमावर्ती हरियाणा के हिसार क्षेत्र में सरकारी व नामी प्राइवेट अस्पतालों के दर्जनों डॉक्टर्स पर एमएलसी में नकली चोट दर्शाकर असली केस बनाने व निर्दोष लोगों को संगीन धाराओं के केसों में फंसाने का सनसनीखेज मामला चूरू के एडवोकेट हरदीपसिंह द्वारा उजागर किया गया था। लगभग उसी की पुनरावृति अब चूरू जिले के राजगढ़ क्षेत्र में भी देखने को मिल रही है। 

करीब ढाई वर्ष पूर्व चूरू जिले के गांव भैंसली में एक ही परिवार के दो गुटों में आपसी झगड़े को लेकर मजरुब सत्यवीर ने हमीरवास थाने में एक एफआईआर दर्ज करवाई थी। पुलिस को दी गयी तहरीर एवं अस्पताल की बैड हैड टिकट,सिटी स्कैन व अन्य रिकॉर्ड में मजरूब सत्यवीर के शरीर पर कोई गंभीर या प्राण घातक चोट नहीं थी। लेकिन पैसे के लालच में मजरूब सत्यवीर और राजगढ़ सीएचसी के मेडिकल ऑफिसर श्रवण कुमार ने साधारण चोटों को गंभीर दर्शाने की साजिश रचते हुए विरोधी पक्ष को संगीन धाराओं के झूठे केस में फंसाने की साजिश रच डाली। 

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अपने चोट प्रतिवेदन में डॉक्टर श्रवण कुमार ने साधारण प्रकृति की चोटों को फर्जी तरीके से ग्रिवियस शार्प व ब्लण्ट दर्शाकर बिना सक्षम मेडिकल बोर्ड के खुद ही पुलिस को मेडिकल ओपिनियन देते हुए उन्हें प्राण घातक चोट घोषित कर दिया ताकि विरोधी पक्ष झूठे मामले में आईपीसी की धारा 307 जैसे संगीन मामले में फंस सके। 

डॉक्टर की करतूत के शिकार पीड़ित पक्ष को जब उक्त डॉक्टर द्वारा फर्जी चोट व मेडिकल ओपिनियन का पता चला तो उन्होंने इस प्रकार फर्जी मामलों को उजागर करने के लिए दिसम्बर 2019 में प्रशासन के उच्च अधिकारियों को मामले से अवगत करवाया। पुलिस की तहरीर और बैड हैड टिकट के प्रूफ सहित सम्पूर्ण बिंदुओं की गहन व निष्पक्ष जाँच के लिए पीड़ित पक्ष ने तत्कालीन चूरू एसपी तेजस्विनी गौत्तम को मामले से अवगत करवाया तथा क्षेत्र में पनप रहे 'नकली चोट-असली केस' के गोरखधंधे पर लगाम लगाने की मांग की। 

तत्कालीन एसपी के निर्देशानुसार उच्च स्तर पर उक्त प्रकरण की बिंदुवार गहन जाँच जारी थी। दुधवाखारा थानाधिकारी रामबिलास बिश्नोई ने अपनी जाँच में पूरे मामले को झूठा पाया। वहीं इसके बाद वृताधिकारी तथा आईपीएस स्तर के जाँच अधिकारियों द्वारा लम्बे समय तक मामले की तथ्यात्मक जाँच की गई तथा उपलब्ध सम्पूर्ण मेडिकल डेटा की जाँच पूर्ण करने के बाद पिछले दिनों जाँच रिपोर्ट एसपी कार्यालय चूरू को सौंपी गई। 

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आखिरकार इस सप्ताह पुलिस अधीक्षक चूरू ने फर्जी चोट व प्राण घातक चोट संबंधित फर्जी मेडिकल रिपोर्ट व मिथ्या मेडिकल राय तैयार करने वाले राजगढ़ सीएचसी में कार्यरत डॉक्टर श्रवण कुमार के खिलाफ लोक सेवक होते हुए निर्दोष व्यक्तियों को क्षति कारित करने के आशय से अशुद्ध मेडिकल दस्तावेज तैयार करने के आरोप में आईपीसी की धारा 167 के तहत मुकदमा दर्ज करवा दिया गया है। मामले का अनुशंधान एडिशनल एसपी राजगढ़ को सौंपा गया है। पुलिस प्रशासन के इस सार्थक कदम से चूरू जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में पनप चुके इस फर्जी मेडिकल रिपोर्ट के गोरखधंधे पर लगाम लगने की उम्मीद है। 

क्यों पैर पसार रहा है फर्जी मेडिकल रिपोर्ट का गोरखधंधा
'नकली चोट-असली केस' प्रकरण को उजागर कर हजारों निर्दोष लोगों को जेल से बाहर लाने वाले तथा लम्बी कानूनी लड़ाई के दम पर इस गोरखधंधे में शामिल 16 डॉक्टर्स को सलाखों के पीछे पहुँचाने वाले राजगढ़,चूरू के एडवोकेट हरदीपसिंह सुंदरिया के मुताबिक हरियाणा में तो यह गोरखधंधा बंद हो चुका है। लेकिन अब सीमाव्रती राजस्थान विशेषकर राजगढ़-भादरा-पिलानी में यह अपने पैर पसार रहा है। 

राजगढ़ में ट्रांसफर की एवज में सत्तासीन स्थानीय जनप्रतिनिधियों के संरक्षण व पैसे के लालच में कुछ डॉक्टर्स ऐसा कुकृत्य कर रहें हैं। कूटरचित मेडिकल रिपोर्ट से विरोधी पक्ष के निर्दोष लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाने का यह खेल पिछले तीन वर्ष से चल रहा है। क्षेत्र में कई अन्य मामलों में भी उक्त डॉक्टर द्वारा फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बनाकर निर्दोष लोगों पर केस दायर करवाए गए हैं। उन प्रकरणों के संबंध में भी सभी सबूतों सहित एसपी कार्यालय व गृह सचिव को लिखित में अवगत करवाया गया है। 

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हमारी मांग है कि समय रहते पुलिस प्रशासन व सरकार इस गोरखधंधे पर लगाम लगाए। साथ ही केवल धारा 167 ही नहीं,इस प्रकार के संगीन सुनियोजित मामलों में इस गोरखधंधे में शामिल लोगों के खिलाफ 195 आईपीसी व धारा 120 बी को भी ऐड करते हुए स्पेशल एसआईटी द्वारा जाँच होनी चाहिए और उक्त डॉक्टर की कुकरतूत के शिकार लोगों के मामलों को रिओपन करना चाहिए।

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