मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, लम्पी स्किन डिजीज को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की

- लंपी स्किन डिजीज की रोकथाम के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश

 
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, लम्पी स्किन डिजीज को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री से गोवंश में फैल रहे लंपी रोग को महामारी घोषित करने की मांग की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि महामारी घोषित करने से इस बीमारी के बढ़ते प्रकोप एवं इससे पशुधन को बचाने के लिए चिकित्सा और परिवहन जैसी सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान के अतिरिक्त 13 राज्यों में इस रोग का प्रसार हो चुका है। राजस्थान सरकार इस रोग से बचाव और उपचार के सभी संभव प्रयास कर रही है। इस संबंध में आवश्यकता के अनुसार रैपिड रेस्पॉन्स टीमें गठित की गई हैं। इसके अलावा पशु परिवहन, पशु हाट और पशु मेलों को प्रतिबंधित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से लंपी बीमारी की रोकथाम के लिए टीका विकसित होने पर राज्य को इसकी पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महामारी के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए केंद्र सरकार के प्रभावी सहयोग की आवश्यकता है। लंपी को महामारी घोषित करने से पशुपालकों और गौशालाओं को पर्याप्त मुआवजा मिल सकेगा।

इससे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लंपी स्किन डिजीज से बचाव और जागरुकता के लिए हर स्तर के जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद किया है और उन्हें आमजन को इस बीमारी के बारे में जागरुक करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही स्वयंसेवी संस्थाओं से भी आगे बढ़कर लंपी बीमारी के रोकथाम के प्रयासों में सरकार का सहयोग करने का आग्रह किया है।

राज्य सरकार द्वारा गौशालाओं को दिये जाने वाले अनुदान अवधि को 6 माह से बढ़ाकर 9 माह किया गया है। रोग प्रभावित क्षेत्रों में अर्जेन्ट टैम्परेरी बेसिस पर 197 पशु चिकित्सा अधिकारियों एवं 730 पशुधन सहायकों को नियमित नियुक्ति प्रदान की गई है। साथ ही किसान फार्मर पोर्टल के माध्यम से 4.32 लाख पशुपालकों व किसानों को लम्पी रोग के बचाव एवं रोकथाम के उपायों की एसएमएस के माध्यम से नियमित जानकारी दी जा रही है। 

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इसके साथ ही राज्य एवं जिला नियंत्रण कक्ष स्थापित करते हुये रोग प्रभावित क्षेत्रों में इस रोग के सर्वेक्षण, रोग निदान एवं उपचार हेतु दल गठित कर त्वरित कार्यवाही की जा रही है। 

किसान कॉल सेन्टर (हेल्पलाइन 181) पर उक्त बीमारी की रोकथाम एवं नियंत्रण से सम्बन्धित पशुपालकों व आमजन की समस्याओं व भ्रांतियों आदि के निराकरण की कार्यवाही की जा रही है। आपातकालीन आवश्यक औषधियां एवं वैक्सीन क्रय करने हेतु 30 करोड़ रूपये का अतिरिक्त आवंटन किए गए हैं। राजस्थान में 46 लाख लंपी गोट पॉक्स वैक्सीन खरीदने की कार्यवाही की जा रही है। 

प्रदेश में 16.22 लाख वैक्सीन उपलब्ध हैं, जिसमें से 12.32 लाख का गौवंशीय पशुओं में टीकाकरण किया जा चुका है। साथ ही 11.59 लाख पशुओं का उपचार किया जा चुका है। रोग प्रभावित क्षेत्र में रोग सर्वेक्षण, रोग निदान एवं उपचार हेतु आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त वाहन किराये पर लिए जाने की स्वीकृति जारी की जा चुकी है।

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