मुख्यमंत्री ने जोधपुर में 73वें राज्यस्तरीय वन महोत्सव का किया शुभारंभ, बोटेनिकल गार्डन एवं लव-कुश वाटिका का शिलान्यास

- पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी जरूरी- मुख्यमंत्री
- कैलाश सांखला स्मृति वन में पौधा लगाकर वृक्षारोपण अभियान की शुरूआत
 
मुख्यमंत्री ने जोधपुर में 73वें राज्यस्तरीय वन महोत्सव का किया शुभारंभ, बोटेनिकल गार्डन एवं लव-कुश वाटिका का शिलान्यास

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन आज की प्राथमिक जरूरत है। उन्होंने इसके लिए हर स्तर पर भागीदारी निभाने के लिए आगे आने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पर्यावरण और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया इस बारे में चिन्तित है। गहलोत ने कहा कि इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों और पर्यावरण चेतना में भागीदारी का संदेश नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।

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मुख्यमंत्री ने मंगलवार को जोधपुर में पद्मश्री कैलाश सांखला स्मृति वन में वन विभाग की ओर से आयोजित 73वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव का शुभारंभ किया। उन्होंने इस मौके पर पौधारोपण किया और स्मृति वन में 5 करोड़ रूपए की लागत से बनने वाले बोटेनिकल गार्डन एवं 2 करोड़ रूपए की लागत से स्थापित होने वाली लव-कुश वाटिका का शिलान्यास किया।

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नवीन पर्यटन केन्द्र लेगा मूर्त रूप
गहलोत ने कहा कि इन विकास कार्यों से प्रकृति की गोद में स्थित कैलाश सांखला स्मृति वन देश-दुनिया में अपनी अनूठी पहचान कायम करेगा। पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा और जोधपुर के लिए नवीन पर्यटन स्थल विकसित होगा। उन्होंने कहा कि इसके विकास में जनभागीदारी से विभिन्न संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं आदि के माध्यम से व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्मृति वन में पौधों के संरक्षण के लिए अपील की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की बेरी गंगा से संबंधित समस्याओं का हल वन विभाग ने कर दिया है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि टाईगर मैन पद्मश्री कैलाश सांखला बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने बचपन में साथ बिताए क्षणों की यादें ताजा की। गहलोत ने कहा कि प्रदेश में वन संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में वन विभाग द्वारा संतोषजनक कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण रक्षा के क्षेत्र में मारवाड़ की अहम भूमिका रही है।उन्होंने कहा कि खेजड़ली में वृक्षों की रक्षा के लिए दिया गया बलिदान देश-दुनिया में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक असाधारण एवं ऐतिहासिक घटना थी।

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गहलोत ने सड़कों के रख-रखाव के लिए स्थानीय निकायों को विशेष अनुदान का आश्वासन भी दिया। इसके साथ ही फीडबैक के आधार पर सभी प्रकार के विकास कार्य कराए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आईटी क्षेत्र के माध्यम से युवाओं को सुनहरा भविष्य प्रदान करने के लिए जोधपुर में फिनटेक यूनिवर्सिटी की स्थापना की जा रही है। गहलोत ने कहा कि चिकित्सा, शिक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा की विभिन्न योजनाएं संचालित हैं और अब राजस्थान को मॉडल स्टेट माना जाता है।

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मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर वन विभाग की ओर से लगाई गई वृहद् प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभागीय गतिविधियों की जानकारी ली। साथ ही स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प उत्पादों, वनौषधियों, वनोपज, हर्बल उत्पादों आदि का अवलोकन किया।

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वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री हेमाराम चौधरी ने राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन तथा वन विभागीय गतिविधियों में उल्लेखनीय तरक्की के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आभार जताया और कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप वन विभाग बेहतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही हुई अच्छी बारिश से विभागीय गतिविधियों को सम्बल मिला है और विभाग द्वारा वृक्षारोपण गतिविधियां युद्धस्तर पर चलाई जा रही हैं।

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प्रभारी मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने जोधपुर एवं राजस्थान के ऐतिहासिक विकास के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पहल और समर्पित प्रयासों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र और हर वर्ग के विकास में प्रदेश को पहचान मिली है।

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समारोह में विधायक मनीषा पंवार, महेन्द्रसिंह विश्नोई, किशनाराम विश्नोई, महापौर कुन्ती देवड़ा परिहार, राजस्थान बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा संगीता बेनीवाल, राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड के अध्यक्ष राजेन्द्रसिंह सोलंकी, रीको निदेशक सुनील परिहार, राजस्थान मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष रमेश बोराणा, पूर्व सांसद बद्रीराम जाखड, जसवन्त सिंह कछवाह, प्रो. अयूब खान, नरेश जोशी, सलीम खान, वन विभाग के प्रमुख शासन सचिव शिखर अग्रवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. दीपनारायण पाण्डेय, संभागीय आयुक्त कैलाशचन्द्र मीणा, जिला कलक्टर हिमांशु गुप्ता, मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक सुराणा सहित जनप्रतिनिधिगण, जिलाधिकारीगण, औद्योगिक एवं व्यवसायिक क्षेत्र से जुड़े उद्यमी एवं व्यवसायी, विभिन्न संगठनों, संस्थाओं के पदाधिकारी, वन विभाग के अधिकारीगण एवं कार्मिक, पर्यावरणप्रेमी एवं आमजन उपस्थित रहे।

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