18वां अखिल भारतीय विधिक सेवा प्राधिकरण सम्मेलन : संविधान के संरक्षण में न्यायपालिका की अहम भूमिका- मुख्यमंत्री

- विधिक सेवाओं को मजबूत बनाने में नालसा की भूमिका अहम
- सभी नागरिकों को सुलभ हो कानूनी सहायता
 
18वां अखिल भारतीय विधिक सेवा प्राधिकरण सम्मेलन : संविधान के संरक्षण में न्यायपालिका की अहम भूमिका- मुख्यमंत्री

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि देश में संवैधानिक मूल्यों का संरक्षण करने में न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका है। वर्तमान हालात में संविधान द्वारा दिये गये अधिकारों को बचाने में न्यायपालिका को अपनी अहम भूमिका निभाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री शनिवार को नालसा द्वारा आयोजित राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के 18वें अखिल भारतीय विधिक सेवा प्राधिकरण सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि नालसा व इसकी राज्य इकाइयां विधिक सेवाओं के प्रचार-प्रसार, निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान करने, अपराध से पीड़ित व्यक्तियों को मुआवजा दिलवाने तथा लोक अदालतों के माध्यम से अधिकाधिक मुकदमों को निपटाने में महती भूमिका निभा रही है। इसके साथ ही, वंचित तबकों को न्याय दिलाने तथा भ्रष्टाचार की रोकथाम में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। लोक अदालतों ने गरीबों, आपदा पीड़ितों, आदिवासियों, वरिष्ठ नागरिकों और एसिड अटैक पीड़ितों को निःशुल्क कानूनी सहायता और मुआवजा दिलवाया है।  

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उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता आदोलन में अधिवक्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और आज भी आम आदमी के हितों की रक्षा करने के लिए अधिवक्ताओं की महती आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सहिष्णुता लोकतंत्र का गहना है। उन्होंने कहा कि आज के हालातों को देखते हुए प्रधानमंत्री को देश को आश्वस्त करना चाहिए कि देश में प्रेम, सद्भावना और भाईचारा बना रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायपालिका का सम्मान सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि राज्यों में राजनैतिक स्थिरता आवश्यक है। इसके लिए जरूरी है कि चुनी हुई सरकारों को खरीद फरोख्त के आधार पर प्रभावित करने की प्रवृति पर अंकुश लगे। 

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मुख्यमंत्री ने इस बात की आवश्यकता पर बल दिया कि समाज के वंचित तबके को न्याय सुलभ हो। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में क्षेत्रीय भाषाओं का उपयोग इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। मुख्यमंत्री ने विचाराधीन कैदियोंकी समस्या को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि इस दिशा में गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है। 

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राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण कर रहा उत्कष्ट्र कार्य
गहलोत ने कहा कि राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने गत वर्षों में विधिक सेवाओं में अभूतपूर्व कार्य करते हुए नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। राज्य सरकार द्वारा प्राधिकरण को वित्तीय वर्ष 2021-22 में 66.51 करोड़ तथा 2022-23 में 67.66 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसके अलावा भवनों के निर्माण और रख-रखाव के लिए भी फण्ड जारी किए गए। लोक अदालतों के सफल अयोजन के लिए अतिरिक्त मैनपावर की व्यवस्था की गई।

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अशोक गहलोत ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत के कार्यों में सम्मिलित रहे राज्य कर्मचारियों को क्षतिपूर्ति अवकाश दिए जाने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा लोगों को समय पर न्याय मिल सके इसके लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को सभी आवश्यक सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इससे अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम होगा।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सम्मेलन में विधि सेवाओं को मजबूत करने तथा पीड़ित वगोर्ं को न्याय दिलाने की दृष्टि से जो भी उपयोगी सुझाव आएंगे उनके क्रियान्वन में राज्य सरकार अपनी भूमिका सकारात्मक रूप से निभाएगी।

न्याय तक सबकी पहुंच है तो लोकतंत्र सफल- मुख्य न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय
सम्मेलन में भारत के मुख्य न्यायाधिपति एन. वी. रमन्ना ने अपने उद्बोधन में कहा कि लोकतंत्र तभी सफल माना जाएगा जब न्याय तक सभी की पहुंच तथा कानून में सभी की भागीदारी सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि जब न्याय व्यवस्था तक गरीब की पहुंच रहेगी तभी वह अपने अधिकारों के उल्लंघन पर कानून का उपयोग कर पाएगा। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में संविधान की मूल भावनाओं को निहित करते हुए आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रयासों तथा नवाचारों की तारीफ करते हुए कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के प्रयासों के तहत काफी हद तक देश में न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के मामलों में कमी आई है। उन्होंने ज्यूडिशियल सिस्टम में आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाने तथा नई भर्तियां करने पर भी जोर दिया जिससे कोर्ट में लंबित मामलों को कम किया जा सके।

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समारोह में केंद्रीय विधि मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि कार्यपालिका तथा न्यायपालिका में तालमेल रहेगा तो संविधान में निहित ’’सभी को न्याय’’ का सपना साकार हो पाएगा। उन्होंने कहा की न्याय का द्वार सभी के लिए खुला होना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा संचालित लोक अदालतों की तारीफ करते हुए कहा कि इसके माध्यम से आमजन को शीघ्र न्याय मिलने पर राहत मिली है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर गैर जरूरी कानूनों को संसदीय व्यवस्था से हटाया गया है जिससे आमजन पर अनावश्यक भार नहीं पड़े। उन्होंने न्यायालयों में क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग करने पर जोर दिया जिससे आमजन को न्यायिक प्रक्रिया की बेहतर समझ हो सकें।

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समारोह में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश उदय उमेश ललित ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की शुरुआत हुए 25 साल हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान प्राधिकरण द्वारा विभिन्न प्रकार के नवाचार किये गए है जिससे कोर्ट में लंबित मामलों में कमी आई है। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण द्वारा संचालित आउटरीच कार्यक्रम के तहत 42 दिनों तक देश के सभी गांवों में न्यायालयों के लंबित मामलों को निपटाया गया।समारोह में राजस्थान के मुख्य न्यायाधीश एस. एस. शिंदे ने भी अपने विचार व्यक्त किए। 

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न्याय के लिए डिजिटल टूल्स लॉन्च
इससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमन्ना द्वारा ई प्रिजन पोर्टल फोर सिटीजन एवं लीगल सर्विस अथॉरिटी के अंतर्गत नवाचार का लोकार्पण किया गया। साथ ही, लीगल ऎड केसेज मैनेजमेंट पोर्टल एवं मोबाइल ऎप फोर लीगल ऎड लायर्स का भी ऑनलाइन लोकार्पण किया गया। 

केंद्रीय विधि मंत्री द्वारा नालसा ऑनलाइन मीडिएशन पोर्टल फॉर कमर्शियल मीडिएशन का ऑनलाइन लोकार्पण किया गया। समारोह में रिलीज यूटीआरसी एट 75 कैंपेन का भी ऑनलाइन लॉन्च किया गया। साथ ही केंद्रीय विधि मंत्रालय तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के बीच 112 एस्पिरेशनल जिलों में लीगल लिटरेसी प्रोग्राम, टेली लॉ तथा न्यायबंधु के लिए एमओयू किया गया। समारोह में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न न्यायाधीश, विभिन्न राज्यों के मुख्य न्यायाधीश, मुख्य सचिव उषा शर्मा सहित संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

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