राफेल, चिनूक, मिराज, सुखोई... भारत के वॉरप्लेनेस चीन बॉर्डर पर उतरे, तवांग तनाव के बीच वायुसेना की दहाड़

 
iaf mirage 2000

हमारे फाइटर जेट्स की गर्जना से दो दिन कांपता रहेगा चीन। थर्राएंगे उसके हिस्से के पहाड़ और जमीन। 15 और 16 दिसंबर को भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट्स और हेलिकॉप्टर सभी उत्तर-पूर्वी राज्यों में करेंगे युद्धाभ्यास। इस दौरान इंडियन एयरफोर्स की दहाड़ बीजिंग तक सुनाई पड़ेगी। आइए जानते हैं कि इस मिलिट्री एक्सरसाइज में कौन से एयरक्राफ्ट्स और एयरफोर्स बेस शामिल हैं।

 

नई दिल्ली। अभी से लेकर अगले 48 घंटे तक ड्रैगन सुनेगा भारतीय शेरों की दहाड़। ऐसी गरज जो बीजिंग तक सुनाई पड़ेगी। उत्तर-पूर्वी राज्यों में हमारी भारतीय वायुसेना मिलिट्री एक्सरसाइज करने जा रही है। इस युद्धाभ्यास में कई लड़ाकू विमान, अटैक हेलिकॉप्टर्स और कार्गो प्लेन शामिल हो रहे हैं। यह एक प्रशिक्षण युद्धाभ्यास है ताकि यह पता किया जा सके कि वायुसेना युद्ध की स्थिति के लिए कितनी तैयार है। 

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यह युद्धाभ्यास उस मौके पर हो रहा है जब अरुणाचल प्रदेश के तवांग में 9 दिसंबर को चीनी सैनिकों ने भारतीय पोस्ट पर कब्जा करने की कोशिश की थी। जिसे भारतीय जवानों ने विफल कर दिया। चीनी सैनिकों को बुरी तरह से पीटा। उन्हें लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) से बाहर फेंक दिया। यह घटना तब हुई थी जब चीन के ड्रोन्स ने सीमा पार करने की कोशिश की थी। उसे रोकने के लिए इंडियन एयरफोर्स ने सुखोई-30एमकेआई फाइटर जेट उड़ा दिए थे। 

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इस युद्धाभ्यास में उत्तर-पूर्व के चार एयरफोर्स बेस भाग ले रहे हैं। ये हैं- तेजपुर, छाबुआ, जोरहाट और हाशिमारा। इन एयरफोर्स स्टेशन के सभी वायुवीरों को सक्रिय और अलर्ट पर रखा गया है। इनके सभी रिसोर्सेज इस युद्धाभ्यास में इस्तेमाल किए जाएंगे। सिर्फ फाइटर जेट्स की तैयारी नहीं देखी जाएगी। इसमें कार्गो ट्रांसपोर्टेशन, आपसी कम्यूनिकेशन, तेजी और समयबद्ध एक्शन की भी जांच की जाएगी। तब जाकर पता चलेगा कि हम युद्ध की स्थिति में हम कितनी तेजी से तैयार हो पाते हैं। फिलहाल आप जानिए उन विमानों के बारे में जो इस युद्धाभ्यास में शामिल हो रहे हैं। 

India China Face-Off

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सुखोई-30एमकेआई (Sukhoi-30MKI)
भारतीय वायुसेना के पास 272 Su-30MKI फाइटर जेट्स हैं। असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन पर 2009 से तैनात हैं। इकलौता ऐसा लड़ाकू विमान है, जिसे हर देश अपनी भौगोलिक स्थितियों के हिसाब से ढाल लेते हैं। यह 72 फीट लंबा और 20.10 फीट ऊंचा है. 48.3 फीट विंगस्पैन वाले इस फाइटर का वजन 18,400 किलोग्राम है। यह 2120 KM/घंटा की तेज गति से उड़ता है। रेंज 3000 किलोमीटर पर हवा में रीफ्यूलिंग हो जाए तो 8000 किमी तक जा सकता है। यह करीब 57 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। यानी हिमालयी इलाकों के लिए सबसे उपयुक्त फाइटर जेट है। 

India China Clash

सुखोई-30एमकेआई में 30mm की एक ग्रिजेव-शिपुनोव ऑटोकैनन लगी है। जो एक मिनट में 150 राउंड फायर करती है। यानी दुश्मन का विमान, ड्रोन या हेलिकॉप्टर बच नहीं सकते। इसमें 12 हार्ड प्वाइंट्स लगे हैं। इसमें 4 तरह के रॉकेट्स, चार तरह की मिसाइल और 10 तरीके के बम लग सकते हैं। या फिर इनका मिश्रण। मल्टीपल रैक्स लगाकर 14 हथियार लगाए जा सकते हैं। इस फाइटर जेट में ब्रह्मोस मिसाइलें भी तैनात हो सकती हैं। चीन भी जानता है कि ब्रह्मोस मिसाइल कितनी घातक और तेज है। अगर भारत ने ब्रह्मोस से हमला किया तो चीन को बचाव का मौका भी नहीं मिलेगा। सुखोई में लगने वाली ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज 500 किलोमीटर है। 

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राफेल फाइटर जेट (Rafale Fighter Jet)
राफेल और यूरोफाइटर का विकास एक फाइटर जेट की तरह ही हुआ था। लेकिन बाद में फ्रांस ने राफेल को प्रोजेक्ट से अलग कर लिया था। भारतीय वायुसेना में 36 राफेल फाइटर जेट्स हैं। इसे एक या दो पायलट उड़ाते हैं। यह 50.1 फीट लंबी, विंगस्पैन 35.9 फीट और ऊंचाई 17.6 फीट है। इसकी अधिकतम गति 1912 KM/घंटा है। लेकिन कॉम्बैट रेंज 1850 किमी है। ऑपरेशनल रेंज 3700 KM है। 

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अधिकतम 51,952 फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। यह एक सेकेंड में 305 मीटर की सीधी उड़ान भरने में सक्षम है। इसमें 30 मिमी की ऑटोकैनन लगी है, जो 125 राउंड प्रति मिनट दागती है। इसके अलावा इसमें 14 हार्डप्वाइंट्स हैं। इसमें एयर-टू-एयर, एयर-टू-ग्राउंड, एयर-टू-सरफेस, न्यूक्लियर डेटरेंस मिसाइलें लगा सकते हैं। इसके अलावा कई अन्य तरह के बमों को भी तैनात किया जा सकता है। 

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मिराज फाइटर जेट (Mirage Fighter Jet)
ये असल में राफेल का पूर्वज है। मिराज 2000 (Mirage 2000) फाइटर जेट्स को उड़ाने के लिए सिर्फ एक पायलट की जरूरत होती है। लंबाई 47.1 फीट और विंगस्पैन 29.11 फीट है। ऊंचाई 17.1 फीट है. वजन 7500 KG है। अधिकतम 2336 किमी/घंटा की गति से उड़ता है। रेंज 1550 किलोमीटर है। रीफ्यूलिंग करने पर 3335 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है। अधिकतम 55,970 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। डॉग फाइट्स के दौरान यह वर्टिकल यानी सीधी उड़ान 56,100 फीट प्रति मिनट की दर से चढ़ता है। 

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मिराज 2000 दुनिया के सबसे घातक फाइटर जेट्स में से एक है। क्योंकि इसमें काफी ज्यादा मात्रा में हथियार लगाए जाते हैं। इसमें 30 मिलीमीटर को दो रिवॉल्वर कैनन लगती हैं। जो प्रति मिनट 125 राउंड फायर करती है। इसमें कुल मिलाकर 9 हार्ड प्वाइंट्स होते हैं, जिसमें से चार पंखों के नीचे और 5 ईंधन टैंक के नीचे। 68 मिलिमीटर के Matra अनगाइडेड रॉकेट पॉड्स लगे होते हैं। हर पॉड्स में 18 रॉकेट होते हैं। 

अब बात करते हैं हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (Air to Air Missiles) की। मिराज में 6 MBDA MICA इंफ्रारेड/रेडियो फ्रिकेंव्सी सीकर मिसाइलें, 2 Matra R550 Magic-2 या 2 मात्रा सुपर 530डी मिसाइलें या फिर भारत में बनी अस्त्र (Astra) मिसाइल लगा सकते हैं। इसके अलावा 2 एम.30 एक्सोसेट या 1 स्कैल्प ईजी मिसाइल तैनात कर सकते हैं। इसमें एमके.82 अनगाइडेड बम लगता है. जबकि Spice 2000 जैसे 8 गाइडेड बम लगाए जा सकते हैं. इसी स्पाइस बम से बालाकोट एयरस्ट्राइक को पूरा किया गया था. यानी बम को टारगेट दिखा दो बस उसके बाद उसका अंत तय है।  

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अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर (Apache Attack Helicopter)
असल में हर जगह फाइटर जेट्स नहीं जा सकते। क्योंकि उनकी गति ज्यादा होती है। इसलिए कुछ जगहों पर हमला करने के लिए अटैक हेलिकॉप्टर्स की जरूरत पड़ती है। AH-64Es अपाचे हेलिकॉप्टर में अत्याधुनिक डिजिटल कनेक्टिविटी है। ज्वाइंट टैक्टिकल इन्फॉर्मेशन डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम है। ज्यादा ताकतवर इंजन है। इसके अलावा फेस गियर ट्रांसमिशन से लैस किया गया है। इसकी गति को, क्लाइंब रेट और पेलोड क्षमता को भी बढ़ाया गया है। इसमें संचार के लिए सी, डी, एल और केयू फ्रिक्वेंसी बैंड की सुविधा है। 

India China border Tawang Dispute

AH-64Es हेलिकॉप्टर को उड़ाकर उसके साथ ड्रोन्स भी उड़ाए जा सकते हैं। यानी एक हेलिकॉप्टर से कई ड्रोन्स को नियंत्रित करके उनसे दुश्मन के इलाके को तबाह किया जा सकता है। इसे उड़ाने के लिए 2 पायलटों की जरूरत होती है। 58.2 फीट लंबे और 12.8 फीट ऊंचे हेलिकॉप्टर का वजन बिना किसी हथियार या ईंधन के 5165 KG है। यह 10,433 KG वजन उठा सकता है।  

इसमें जनरल इलेक्ट्रिक के 2 टी700-जीई-701 टर्बोशिफ्ट इंजन लगे हैं। जो 1409 किलोवॉट की ताकत देते हैं। अधिकतम 293 KM/घंटा की स्पीड से उड़ सकता है। इसकी कॉम्बैट रेंज 476 किलोमीटर है। सामान्य फेरी रेंज 1896 किलोमीटर है। अधिकतम 20 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। इसमें एक 30 मिमी की एम230 चेन गन लगी है। जो एक मिनट में 1200 राउंड फायर करती है। इसके अलावा चार पाइलॉन हार्डप्वाइंट्स हैं। विंगटिप पर AIM-92 स्टिंगर ट्विन मिसाइल पैक लगाया जा सकता है। 

AH-64Es अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर में 70 मिमी के Hydra-70, CRV, APKWS या हवा से जमीन पर मार करने वाले रॉकेट लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा इसमें AGM-114 हेलफायर मिसाइल के वैरिएंट्स लगाए जा सकते हैं। साथ ही हवा से हवा में मार करने वाली स्टिंगर, एजीएम-65 मैवरिक और स्पाइक मिसाइलें लगाई जा सकती हैं।  

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चिनूक हैवी ट्रांसपोर्ट हेलिकॉप्टर (Chinook Heavy Transport Helicopter)
अमेरिकी मालवाहक व परिवहन हेलिकॉप्टर। दुनिया के सबसे बड़े हेलिकॉप्टरों में से एक। इसमें तीन क्रू होते हैं। पायलट, को-पायलट, फ्लाइट इंजीनियर या लोडमास्टर। इस हेलिकॉप्टर में 33 से 55 सैनिक, 24 स्ट्रेचर या करीब 11 हजार किलोग्राम वजन उठाया जा सकता है। यह हेलिकॉप्टर 98 फीट लंबा होता है। 

Indian Air Force Excercise

चौड़ाई 12.5 फीट और ऊंचाई 18.11 फीट है। यह अधिकतम 315 किमी प्रतिघंटा की गति से उड़ता है। इसमें दो पंखे लगे होते हैं। इसकी रेंज 740 किमी है। यह अधिकतम 20 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है। इसमें 3 पिंटल-माउंटेड मीडियम मशीन गन या एम134 मिनिगन रोटरी मशीन गन तैनात कर सकते हैं। 

भारत के पास 15 Ch-47F(I) चिनूक ट्रांसपोर्ट हेलिकॉप्टर्स हैं। जिनका इस्तेमाल आपदा, राहत एवं बचाव के साथ-साथ युद्धक्षेत्रों में हथियार, टैंक, रसद और सैनिक पहुंचाने के लिए होता है। इन हेलिकॉप्टरों को मोदी सरकार ने साल 2015 में अमेरिका से एक डील के तहत खरीदा था।     

चिनूक हेलिकॉप्टरों ने लद्दाख में चीन के साथ चल रहे विवाद के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ये हेलिकॉप्टर चंडीगढ़ एयरबेस पर तैनात हैं। हाल ही में इसने चंडीगढ़ से नॉर्थ-ईस्ट तक लगातार उड़ान भरी थी। यानी हेलिकॉप्टर उत्तर-पूर्व के किसी एयरबेस पर तैनात है। चिनूक हेलिकॉप्टर M777 Ultra Light हॉवित्जर तोप को भी उठा कर कहीं भी आ-जा सकता है। 

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सी-130जे सुपर हरक्यूलस (C-130J Super Hercules)
इंडियन एयरफोर्स के पास 11 सी-130जे सुपर हरक्यूलस ट्रांसपोर्ट विमान हैं। ये टैक्टिकल एयरलिफ्टर कहे जाते हैं। ये अपने पेट में 92 यात्री, 64 एयरबॉर्न सैनिक, 6 पैलेट्स या 74 मरीजों के साथ 5 मेडिकल स्टाफ को लिफ्ट कर सकता है। इसके अंदर 2 या 3 बड़ी हमवी जीप लोड की जा सकती है। ये अपने नाम की तरह ही ताकतवर है।

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97.9 फीट लंबे और 38.10 फीट विंगस्पैन वाले इस कार्गो प्लेन की ऊंचाई 38.10 फीट है। जब यह प्लेन खाली रहता है तब इसका वजन 34,374 किलोग्राम रहता है। लेकिन यह अपने साथ 70 हजार किलोग्राम से ज्यादा वजन उठा सकता है। 22 हजार फीट की ऊंचाई पर अधिकतम 670 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से उड़ सकता है। 

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आमतौर पर इसकी क्रूज स्पीड 644 किलोमीटर प्रतिघंटा है। इसकी रेंज 3300 किलोमीटर है। अधिकतम 28 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। इससे ऊपर ले जाने के लिए इसका वजन कम करना होगा। खाली यह 40 हजार फीट की अधिकतम ऊंचाई तक जा सकता है। 

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